
एएसआई राजेंद्र प्रसाद यादव के ट्रांसफर पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
जबलपुर। उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता राजेंद्र प्रसाद यादव बनाम मध्य प्रदेश राज्य व अन्य के मामले में पुलिस विभाग के स्थानांतरण आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकल पीठ ने उमरिया पुलिस अधीक्षक द्वारा 29 मई 2026 को जारी उस आदेश को स्थगित किया, जिसमें मानपुर थाने से रक्षित केंद्र ट्रांसफर किया गया था। इस मामले में याचिकाकर्ता के वकील अजय शंकर रायजादा, प्रभात यादव और अमित रायजादा ने पैरवी की, जिसके बाद अदालत ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर 6 सप्ताह में जवाब मांगा है।
पदोन्नति की शर्तों के उल्लंघन पर रोक
यह मामला एक आरक्षक की विभागीय तरक्की और उसके बाद कैडर बदलने से जुड़ा है। याचिकाकर्ता को 11 फरवरी 1995 को कांस्टेबल ट्रेड कुक के रूप में पुलिस विभाग में सेवा का अवसर मिला था। लंबी सेवा के बाद 16 अगस्त 2013 को उन्हें सहायक उप निरीक्षक यानी एएसआई के पद पर पदोन्नत किया गया। इस प्रमोशन के साथ खास बात यह थी कि उनके नए पद के साथ कोई भी ट्रेड संवर्ग शामिल नहीं था।
छह सप्ताह के भीतर मांगा जवाब
अदालत में वकीलों ने दलील दी कि बिना ट्रेड वाले पद के बावजूद उन्हें रक्षित केंद्र भेजना नियम विरुद्ध है। यह स्थानांतरण उनके प्रमोशन के समय तय की गई सेवा शर्तों का सीधे तौर पर उल्लंघन करता है। प्रारंभिक दलीलें सुनने के बाद माननीय न्यायालय ने ट्रांसफर आर्डर के क्रियान्वयन पर आगामी सुनवाई तक स्टे दे दिया है। अब इस कानूनी विवाद की अगली सुनवाई 6 सप्ताह बाद की जाएगी।
