
जबलपुर। जबलपुर में जीवनदायिनी नर्मदा नदी का जलस्तर बहुत तेजी से नीचे चला गया है, जिसके कारण प्रसिद्ध गौरीघाट और उमाघाट पर नदी की तलहटी तथा बड़ी-बड़ी चट्टानें साफ दिखाई देने लगी हैं। स्थिति यह हो गई है कि श्रद्धालु अब नाव के बिना ही पैदल चलकर बीच धारा में बने मंदिर तक पहुंच रहे हैं। लगातार हो रही पानी की कटौती और बरगी बांध में जलस्तर के रिकॉर्ड गिरावट के कारण शहर में भीषण जलसंकट की स्थिति पैदा हो गई है। नदी का पानी गंदा होने लगा है और ललपुर जलशोधन संयंत्र के साथ-साथ वेस्ट सेंट्रल रेलवे द्वारा किए जा रहे जल दोहन से संकट और गहरा गया है। यदि मानसून आने में थोड़ी भी देरी हुई, तो जबलपुर की एक बड़ी आबादी को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना पड़ सकता है।
घटते जलस्तर से बेपटरी हुई शहर की जलापूर्ति व्यवस्था
नर्मदा नदी में पानी कम होने का मुख्य कारण शहर की लगातार आपूर्ति और बरगी बांध का खाली होना है। वर्तमान में बरगी बांध में महज 5 मीटर पानी ही शेष बचा है, जिसके कारण आगे पानी छोड़ना संभव नहीं हो पा रहा है। ललपुर जलशोधन संयंत्र से शहर के कई प्रमुख इलाकों में पानी भेजा जाता है, लेकिन नदी सूखने से अब यह सप्लाई ठप होने की कगार पर है। इसके साथ ही वेस्ट सेंट्रल रेलवे भी अपनी जरूरतों के लिए लगातार नर्मदा से पानी ले रहा है, जिससे गौरीघाट का जलस्तर ऐतिहासिक रूप से गिरा है।
प्री-मानसून की बेरुखी से बढ़ा तापमान
जबलपुर में सूरज और बादलों की आंखमिचौली के बीच धूप का असर लगातार तेज हो रहा है, जिससे दिन का तापमान तेजी से बढ़ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, प्री-मानसून के बादल रोजाना आसमान में छा रहे हैं, लेकिन वे बरस नहीं रहे हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि आगामी 4-5 दिनों के भीतर मानसून के महाराष्ट्र, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ के रास्ते आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं, जिससे आने वाले दिनों में तेज हवाओं के साथ जोरदार बौछारें पड़ने की उम्मीद है।
