बालाघाट के बिरसा में मौसमी बीमारियों का हमला, जबलपुर से विशेषज्ञों की टीम पहुंची

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जबलपुर से विशेषज्ञों की टीम पहुंची, 20 टीमों ने घर-घर जांच शुरू की

जबलपुर। बालाघाट जिले के बिरसा विकासखंड में बच्चों में मौसमी बीमारियों का प्रकोप सामने आया है। जून माह के अंत से 12 अगस्त 2026 तक कुंडेकसा, अडोरी, कोरका और बंडारी गांवों से लगभग 100 बच्चों को सर्दी-खांसी, बुखार, त्वचा रोग, खसरा, खुजली तथा मलेरिया के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान शुरुआत में 7 बच्चों की मृत्यु हुई, जबकि 93 बच्चे पूरी तरह स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं। वर्तमान में 15 बच्चों का इलाज चल रहा है और उनकी स्थिति स्थिर है। जिला स्तर पर बीमारियों से प्रभावित कुल 372 मरीजों की पहचान की गई, जिनमें से 256 लोग घर पर ही उपचार के बाद ठीक हो गए। स्वास्थ्य विभाग ने पूरे क्षेत्र में सघन निगरानी और डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग शुरू कर दी है, जिससे स्थिति नियंत्रण में है।

​आईसीएमआर लैब भेजे गए नमूनों की जांच जारी

​बीमारी के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए मरीजों के खून और त्वचा पर पड़े चकत्तों के सैंपल एकत्रित किए गए हैं। इन नमूनों को त्वरित जांच के लिए आईसीएमआर की प्रयोगशालाओं में भेजा गया है। लैब रिपोर्ट के आधार पर ही आगे का इलाज और जनस्वास्थ्य रणनीति तय की जाएगी। राज्य स्तर की महामारी विज्ञान टीमों ने प्रभावित हॉटस्पॉट गांवों बंडारी, कुंडेकसा और कोरका का दौरा कर स्थिति का विस्तृत मूल्यांकन किया है। प्रशासनिक स्तर पर पूरे इलाके की 24 घंटे सर्विलांस की जा रही है, ताकि नए मरीजों की समय रहते पहचान हो सके।

​जबलपुर से पहुंची विशेषज्ञों की विशेष मेडिकल टीम

​हालात पर काबू पाने के लिए जबलपुर मेडिकल कॉलेज से शिशु रोग विशेषज्ञों और कम्युनिटी मेडिसिन एक्सपर्ट्स की विशेष टीम बालाघाट भेजी गई है। इसके अलावा स्वास्थ्य सेवा आयुक्त के नेतृत्व में राज्य स्तरीय दल मैदानी स्तर पर स्थिति का जायजा ले रहा है। यह टीम स्थानीय डॉक्टरों के साथ समन्वय बनाकर काम कर रही है, ताकि गंभीर मरीजों को तुरंत बेहतर इलाज मिल सके। प्राथमिक रूप से चिन्हित सभी हॉटस्पॉट इलाकों में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बताई जा रही है और प्रशासन हर स्तर पर सतर्कता बरत रहा है।

​20 दल कर रहे घर-घर स्वास्थ्य सर्वेक्षण

​मैदानी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 20 सर्वेक्षण दल तैनात किए गए हैं, जो प्रभावित तथा आसपास के गांवों में घर-घर जाकर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर रहे हैं। आपात स्थिति से निपटने के लिए 10 मेडिकल ऑफिसर और 4 एंबुलेंस लगातार क्षेत्र में मुस्तैद हैं। हल्के लक्षण वाले बच्चों को चिन्हित कर तुरंत दवाइयां दी जा रही हैं, जबकि आवश्यकता पड़ने पर मरीजों को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा है। बहुस्तरीय व्यवस्था के कारण क्षेत्र में बीमारी के फैलाव पर रोक लगी है और नए मामलों की लगातार निगरानी की जा रही है।

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