कछपुरा मालगोदाम के कारण रिहायशी इलाकों की हवा हुई जहरीली, कोर्ट तक पहुंचा विवाद,मांगे 100 करोड़

Newzo
Newzo - News Editor 60 Views
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जबलपुर। शहर के कछपुरा मालगोदाम में नियमों के विपरीत सीमेंट और खाद की अनलोडिंग से फैले भारी प्रदूषण के खिलाफ नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने बड़ी कार्रवाई की है। मंच के अध्यक्ष डॉ. पी.जी. नाजपांडे और रजत भार्गव ने रेलवे बोर्ड नई दिल्ली के चेयरमैन और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को एक महत्वपूर्ण नोटिस भेजा है। इस नोटिस में अवैध लोडिंग से प्रभावित संजीवनी नगर, कंचन नगर, पुष्प नगर, गुरुकुंज कॉलोनी, गणेश नगर, श्रीनगर और भूलन बस्ती के पीड़ित निवासियों के लिए 100 करोड़ रुपये का पर्यावरण मुआवजा देने की मांग की गई है। एडवोकेट प्रभात यादव के अनुसार, 5 अप्रैल 2023 को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा केवल खाद्यान्न सामग्री की अनुमति देने के बावजूद पिछले 3 वर्षों से यहाँ लगातार नियमों का गंभीर उल्लंघन किया जा रहा था।

कछपुरा मालगोदाम में नियमों की अनदेखी से आम नागरिकों का स्वास्थ्य खतरे में पड़ा

​मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 5 अप्रैल 2023 को कछपुरा मालगोदाम के लिए जो सहमति आदेश जारी किया था, उसमें केवल अनाज और खाद्य पदार्थों के रख-रखाव की अनुमति दी गई थी। इसके विपरीत वहाँ लंबे समय से सीमेंट, खाद और आयरन ओर जैसी भारी प्रदूषण फैलाने वाली सामग्रियों की लोडिंग और अनलोडिंग का काम धड़ल्ले से चल रहा है। इस अवैध गतिविधि के कारण कछपुरा क्षेत्र और उसके आस-पास की घनी आबादी वाली कॉलोनियों में हवा और ध्वनि प्रदूषण का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ गया है। हवा में जहरीले केमिकल और धूल के कण मिलने से स्थानीय नागरिकों का जीना दूभर हो गया है और उनके स्वास्थ्य पर इसका बेहद बुरा असर पड़ रहा है। रेलवे द्वारा नियमों की अनदेखी करके दी गई इस अनधिकृत अनुमति के कारण ही हजारों लोगों के स्वास्थ्य के साथ यह बड़ा खिलवाड़ हुआ है।

अवैध व्यावसायिक गतिविधियों को रोकने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका दायर

​इस मामले की गंभीरता को देखते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में दो अलग-अलग याचिकाएं ओ.ए. नंबर 39/2025 तथा 8/2026 दायर की गई हैं। इन याचिकाओं के माध्यम से कोर्ट से कछपुरा मालगोदाम में चल रही सभी अवैध गतिविधियों पर तुरंत रोक लगाने की प्रार्थना की गई है। डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने बताया कि कानूनी दिशा-निर्देशों का खुला उल्लंघन होने के कारण अब रेलवे प्रशासन को इसकी पूरी जिम्मेदारी लेनी होगी और पीड़ितों को हर्जाना देना होगा। पिछले 3 सालों से लगातार धूल और केमिकल युक्त हवा में सांस ले रहे स्थानीय निवासियों की आर्थिक और शारीरिक क्षति की भरपाई के लिए ही 100 करोड़ रुपये के हर्जाने का दावा किया गया है। वर्तमान में यह पूरा मामला एनजीटी के समक्ष विचाराधीन है और नागरिक मंच इस पर लगातार सख्त कदम उठा रहा है।

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