शिक्षा विभाग की अंधेरगर्दी: जिनकी खुद की नैया मंझधार में अटकी, उन्हीं साहब के जिम्मे पूरे जिले की तरक्की!

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Newzo - News Editor 18 Views
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प्राचार्य आरके वधान के इंक्रीमेंट रुकने के बाद उनका कमेटी में होना कई सवालों को दे जन्म

जबलपुर कलेक्टर और भोपाल तक पहुंची शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही,जल्दी हो सकता है एक्शन

जबलपुर। मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल ने जबलपुर के प्रभारी सहायक संचालक आर.के. वधान की 2 वार्षिक वेतनवृद्धि असंचयी प्रभाव से रोकने के सख्त आदेश जारी किए हैं। इसके बावजूद वर्तमान में वे जिला इंक्रीमेंट कमेटी के सदस्य बने हुए हैं। इस प्रशासनिक विडंबना को लेकर जिले भर के शिक्षकों में भारी आक्रोश है और शिक्षा विभाग के आला अधिकारी भी सवालों के घेरे में आ गए हैं। इस पूरे मामले की लिखित शिकायत अब जबलपुर कलेक्टर और भोपाल स्तर तक पहुंचा दी गई है, जिससे विभाग में हड़कंप मच गया है और जल्द ही इस पर कोई बड़ा प्रशासनिक निर्णय होने की संभावना जताई जा रही है। संबंध में कई सवाल भी पैदा हो रहे हैं,क्योंकि जबलपुर में जो अधिकारी हैं उन्हें पता है कि श्री वधान पर क्या कार्रवाई हुई है उसके बाद भी उन्हें कमेटी में रखना कई तरह की विसंगतियों को जन्म दे रहा है।

​जांच में खुली पोल तो दोषी अधिकारी पर गिरी गाज

​भोपाल से जारी आदेश के अनुसार आर.के. वधान तत्कालीन प्राचार्य शासकीय उमावि. महगवाँ जबलपुर के पद पर तैनात थे। वर्तमान में वे जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय जबलपुर में प्रभारी सहायक संचालक के रूप में काम देख रहे हैं। विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक में उन्होंने एक ऐसे कर्मचारी को गलत तरीके से क्रमोन्नति का आर्थिक लाभ दे दिया था जिसने खुद अपनी पदोन्नति त्याग दी थी। इस घोर लापरवाही को लेकर विभाग ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब मांगा था। उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, जिसके बाद मध्य प्रदेश सिविल सेवा वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील नियम 1966 के नियम 10(4) के तहत उनकी वेतनवृद्धि रोकने की यह बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की गई।

​अपनी सफाई में संकुल प्राचार्य पर मढ़ा पूरा दोष

​इस पूरे मामले में संचालनालय ने पत्र क्रमांक 1117-1118 भोपाल दिनांक 26.11.2025 के माध्यम से नियम 16 के तहत नोटिस जारी किया था। इसके लिखित जवाब में आर.के. वधान ने अपनी सफाई पेश करते हुए सारा दोष संकुल प्राचार्य पर मढ़ दिया। उन्होंने दलील दी कि शासकीय उमावि. धनपुरी के संकुल प्राचार्य से जो प्रस्ताव मिला था, उसी के आधार पर समिति ने यह अनुशंसा की थी। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के एक आदेश की शर्त का हवाला भी दिया कि यदि कोई विपरीत स्थिति थी तो आहरण संवितरण अधिकारी को लाभ रोकना चाहिए था। संकुल प्राचार्य द्वारा समय पर कोई आपत्ति नहीं भेजने के कारण उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए अपनी वेतनवृद्धि रोकने की कार्रवाई को निरस्त करने की मांग की थी।

​उच्च स्तर पर सूक्ष्म परीक्षण में प्रमाणित हुई लापरवाही

​उच्च अधिकारियों ने जब इस लिखित जवाब का बारीकी से परीक्षण किया तो जिला स्तरीय समिति की गंभीर कमियां सामने आ गईं। आर.के. वधान इस समिति में सदस्य के रूप में मनोनीत थे, लेकिन उन्होंने कर्मचारी के सेवा अभिलेखों का सही तरीके से सत्यापन नहीं किया। समिति की बैठक के कार्यवाही विवरण में भी किसी विभागीय जांच, कोर्ट केस या पदोन्नति त्यागने की जरूरी जानकारी को छिपाया गया। इस लापरवाही के कारण अपात्र कर्मचारी को गलत वित्तीय लाभ मिला, जिससे सरकार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा और अदालती मामले खड़े हुए। इसी कारण लोक शिक्षण आयुक्त ने 17-04-2026 को आदेश क्रमांक 271/2025/165 जारी कर यह सजा तय की, जिसकी प्रतिलिपि स्कूल शिक्षा विभाग के उप सचिव और कलेक्टर को भेजी गई है।

मामला संज्ञान में कार्यवाही की जाएगी:द्विवेदी

लोक शिक्षण संचनालय भोपाल संचालक केके द्विवेदी ने कहा कि इस संबंध में संज्ञान लिया गया है और जिला शिक्षा अधिकारी को जल्दी निर्देश दिए जाएंगे।

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