
महाकोशल कॉलेज में करियर काउंसलिंग सत्र आयोजित कर युवाओं को दिए सफलता के मंत्र
जबलपुर। स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्शन योजना के तहत शासकीय महाकोशल स्वशासी अग्रणी महाविद्यालय में विद्यार्थियों को भविष्य की राह दिखाने के लिए एक विशेष मार्गदर्शक सत्र आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में हिन्दी, संस्कृत, इतिहास, अंग्रेजी, भूगोल और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे विविध विषयों के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने छात्र-छात्राओं को रोजगार के नए अवसरों की जानकारी दी। प्राचार्य डाॅ. अलकेश चतुर्वेदी, संभागीय समन्वयक प्रो. अरुण शुक्ल, डाॅ. डी.के.मिश्रा, डाॅ. शैलेन्द्र श्रीवास्तव, डाॅ. हेमंत तनकंपन और डाॅ. रविश तमन्ना ताजिर ने युवाओं को अपनी रुचि और आधुनिक बाजार की जरूरतों के हिसाब से सही दिशा चुनने की सलाह दी। इस ज्ञानवर्धक आयोजन में कुल 43 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी शंकाओं का समाधान किया।
पारंपरिक और व्यावहारिक विषयों में रोजगार के उभरते नए रास्ते
महाविद्यालय में आयोजित इस सत्र में विषय विशेषज्ञों ने पारंपरिक और आधुनिक दोनों क्षेत्रों में छिपे अवसरों को उजागर किया। इतिहास के जानकार डाॅ. अलकेश चतुर्वेदी ने बताया कि यह विषय केवल पुरानी घटनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि पुरातत्व, संग्रहालय प्रबंधन, अभिलेखागार, पर्यटन और प्रशासनिक सेवाओं में सुनहरे अवसर देता है। हिन्दी के विशेषज्ञ प्रो. अरुण शुक्ल ने मीडिया, विज्ञापन, अनुवाद और जनसंपर्क में हिन्दी की बढ़ती ताकत को रेखांकित किया। भूगोल के विशेषज्ञ डाॅ. डी.के.मिश्रा ने विद्यार्थियों को भू-स्थानिक तकनीक, रिमोट सेंसिंग, आपदा प्रबंधन और मौसम विज्ञान जैसे तकनीकी और व्यावहारिक क्षेत्रों की उपयोगिता समझाई। विशेषज्ञों का मानना है कि बुनियादी विषयों की मजबूत समझ प्रशासनिक और अकादमिक करियर की मजबूत नींव तैयार करती है।
तकनीकी बदलाव और भाषाई कौशल से संवरेगा छात्र-छात्राओं का भविष्य
तकनीकी और भाषाई कौशल को आज के दौर की सबसे बड़ी जरूरत बताते हुए विशेषज्ञों ने नए रास्ते सुझाए। एआई विशेषज्ञ डाॅ. शैलेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, रोबोटिक्स और साइबर सुरक्षा में कुशल युवाओं की मांग आने वाले समय में बहुत तेजी से बढ़ेगी। अंग्रेजी के जानकार डाॅ. हेमंत तनकंपन ने कॉर्पोरेट संचार, कंटेंट डेवलपमेंट और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में भाषा और प्रभावी संवाद की भूमिका को जरूरी बताया। संस्कृत के विशेषज्ञ डाॅ. रविश तमन्ना ताजिर ने भारतीय ज्ञान प्रणाली, पांडुलिपि संरक्षण, योग और सांस्कृतिक शोध में रोजगार की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को वर्तमान समय की मांग के अनुसार कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित करना रहा।
