विधायक की छत्रछाया में बिना ब्रेक के दौड़ रहा जुआ, सट्टा और अवैध शराब का कारोबार, चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल

जबलपुर। जबलपुर जिले के एक विधानसभा क्षेत्र के विधायक इन दिनों अपने विकास कार्यों के बजाय अपनी अनोखी कार्यप्रणाली और विवादों के कारण भारी सुर्खियों में हैं। विधायक की शिकायत सीधे भोपाल में प्रदेश संगठन के सर्वेसर्वा हेमंत खंडेलवाल तक पहुंच चुकी है, जिसमें क्षेत्र में फैले अवैध कारोबार के पक्के प्रमाण सौंपे गए हैं। इस गंभीर मामले को लेकर जुलाई के प्रथम सप्ताह में विधायक की एक बड़ी पेशी यानी व्यक्तिगत सुनवाई होने की पूरी संभावना बन गई है। जनता का आरोप है कि विधायक महीने में सिर्फ 15 दिन क्षेत्र में रहते हैं और शेष 15 दिन गायब रहते हैं, जबकि उनके सरकारी नौकरी वाले परिजन खुद को विधायक मानकर पूरा काम संभाल रहे हैं।
जो अवैध वो सब वैध है
जिले के इस विधानसभा क्षेत्र में जनप्रतिनिधि की निष्क्रियता और उनके संरक्षण में चल रहे अवैध कामों का पूरा ब्यौरा तैयार करके भोपाल भेजा गया है। हेमंत खंडेलवाल के पास पहुंची इस शिकायत में स्पष्ट उल्लेख है कि क्षेत्र में जुआ, सट्टा और अवैध शराब का धंधा धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। कई जगहों पर खुलेआम अहाते चल रहे हैं, जिन पर प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं रह गया है। इन सभी अनैतिक गतिविधियों की पूरी रिकॉर्डिंग और पक्के सबूत संगठन को सौंपे गए हैं, जिसके बाद अब जुलाई के प्रथम सप्ताह में विधायक की जवाबदेही तय करने के लिए भोपाल में बड़ी बैठक की तैयारी है।
परिजनों के दखल से परेशान कार्यकर्ता
विधायक की अनुपस्थिति में उनके परिवार के सदस्य पूरी विधानसभा में सक्रिय हैं और खुद को विधायक की तरह पेश कर रहे हैं। सबसे अचरज की बात यह है कि ये परिजन सरकारी नौकरी में पदस्थ हैं, इसके बावजूद वे खुलेआम राजनीतिक और प्रशासनिक कार्यों में दखल दे रहे हैं। विधायक के इस रवैए से न केवल क्षेत्र की आम जनता परेशान है, बल्कि पार्टी के मूल कार्यकर्ता भी खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि उनकी मेहनत को दरकिनार करके केवल कुछ चुनिंदा करीबियों और रिश्तेदारों को ही तरजीह दी जा रही है।
सिफारिशी पत्र के लिए भटक रहे विधानसभा के मतदाता
क्षेत्र के मतदाता अपनी जरूरी समस्याओं और तबादलों के सिफारिशी पत्र लिखवाने के लिए रोजाना दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। आम लोगों की लंबी कतारें लगने के बाद भी विधायक महोदय पत्र लिखने से कतराते हैं, जिससे जनता में भारी निराशा है। इसके विपरीत, विधायक के आस-पास रहने वाले कुछ खास लोगों के काम और उनकी सिफारिशें तुरंत पूरी की जा रही हैं। ढाई साल का लंबा समय बीत जाने के बाद भी विधायक ने आज तक अपने क्षेत्र के सभी गली-मोहल्लों का दौरा तक नहीं किया है, जिससे लोग अब जनहित के कार्यों की उम्मीद छोड़ चुके हैं।
भोपाल के एक्शन पर टिकी निगाहें
चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करके वोट लेने वाले जनप्रतिनिधि की जमीनी हकीकत सामने आने के बाद अब गेंद भोपाल बैठे बड़े नेताओं के पाले में है। क्षेत्र की भोली-भाली जनता अब यह देख रही है कि संगठन के आला अधिकारी इस गंभीर नाइंसाफी पर क्या कड़ा कदम उठाते हैं। ढाई साल में जो नेता अपने पूरे क्षेत्र की सीमाओं और मतदाताओं से रूबरू नहीं हो सका, उससे विकास की उम्मीद करना बेमानी साबित हो रहा है। अब देखना होगा कि जुलाई के पहले हफ्ते में होने वाली इस समीक्षा से क्षेत्र की दशा और दिशा में क्या बदलाव आता है।
