डिप्रेशन को कहो ‘बाय-बाय’, योग और काउंसिलिंग से बनेगी बिगड़ी बात

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Newzo - News Editor
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उच्च शिक्षा विभाग और महाकोशल कॉलेज ने मिलकर तैयार की जागरूकता की रणनीति

अभिभावक बच्चों पर न डालें उम्मीदों का बोझ, घर में दें सकारात्मक माहौल

    जबलपुर। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय महाकोशल कॉलेज, जबलपुर में आत्महत्या की रोकथाम विषय पर संभाग स्तरीय सेंसटाइजेशन कार्यक्रम संपन्न हुआ। उच्च शिक्षा विभाग जबलपुर संभाग के अतिरिक्त संचालक डॉ. पंजाबराव चंदेलकर के मुख्य आतिथ्य और सेवानिवृत्त मनोविज्ञान प्राध्यापक डॉ. सुधा मेहता के मुख्य वक्तव्य में यह आयोजन हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. अलकेश चतुर्वेदी ने की, जबकि शासकीय अधिवक्ता सुयश ठाकुर बतौर वक्ता, प्रो. अरुण शुक्ल कार्यक्रम समन्वयक और डॉ. राहुल पटेल कार्यक्रम संयोजक के रूप में उपस्थित रहे। अतिथियों ने सरस्वती पूजन और दीप प्रज्वलन कर अभियान की शुरुआत की। इस दौरान वक्ताओं ने समाज में बढ़ती निराशा को दूर करने और मानसिक रूप से कमजोर लोगों को संबल प्रदान करने की आवश्यकता पर बल दिया।

    ​तनाव और सामाजिक दबाव बनते हैं आत्मघाती कदम की वजह

    ​मुख्य अतिथि डॉ. पंजाबराव चंदेलकर ने देश में बढ़ते आत्महत्या के मामलों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि किसानों की माली हालत, परीक्षाओं का अत्यधिक दबाव, पारिवारिक कलह, अकेलापन और सामाजिक अपेक्षाएं व्यक्ति को इस आत्मघाती कदम की ओर धकेलती हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों की मानसिक स्थिति को समझें और उन पर किसी भी तरह का अनावश्यक दबाव न बनाएं, बल्कि घर में एक सकारात्मक और सहयोगात्मक माहौल तैयार करें।

    ​हर समस्या का हल मुमकिन, जीवन का कोई दूसरा विकल्प नहीं

    ​मुख्य वक्ता डॉ. सुधा मेहता ने स्पष्ट किया कि आत्महत्या का विचार अचानक नहीं आता। जब व्यक्ति शैक्षणिक असफलता, बेरोजगारी, आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव के कारण खुद को असहाय और अकेला पाता है, तब ऐसे विचार मन में पनपते हैं। उन्होंने कहा कि हर समस्या का समाधान मुमकिन है, लेकिन जीवन का कोई दूसरा विकल्प नहीं हो सकता। इससे बचने के लिए अवसाद के लक्षणों को पहचानना, अपनों से खुलकर बात करना, योग, ध्यान और जरूरत पड़ने पर काउंसलर की मदद लेना बेहद जरूरी है।

    ​छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए राष्ट्रीय टास्क फोर्स सक्रिय

    ​अधिवक्ता सुयश ठाकुर ने कानूनी और राष्ट्रीय स्तर पर हो रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने छात्र आत्महत्याओं को एक राष्ट्रीय चिंता माना है, जिसके बाद राष्ट्रीय टास्क फोर्स का गठन किया गया है। यह टास्क फोर्स छात्रों के मानसिक तनाव और शैक्षणिक दबाव का अध्ययन कर रही है। अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. अलकेश चतुर्वेदी ने कहा कि आसपास के लोगों को अकेला न छोड़ना ही सबसे बड़ी रोकथाम है। प्रो. अरुण शुक्ल ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को हर व्यक्ति तक सुलभ बनाना है। इस अवसर पर डॉ. रंजना मिश्रा ने प्रस्तावना रखी। मंच संचालन श्रीमती बुशरा खान और सुश्री रुपाली उपाध्याय ने किया। आभार प्रदर्शन सुश्री साक्षी मरावी और सुश्री उमा भारती धुर्वे ने किया। कार्यक्रम में डॉ. स्मृति शुक्ला, डॉ. पवन तिवारी, डॉ. सुनील वाजपेयी, डॉ. चित्रा प्रभात, डॉ. लक्ष्मीचंद, डॉ. वीणा वाजपेई, डॉ. शुभांगी धगट सहित जबलपुर संभाग के विभिन्न कॉलेजों के प्राचार्य और नोडल अधिकारी उपस्थित रहे।

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