
नई दिल्ली। उच्च सदन राज्य सभा की खाली सीटों को भरने के लिए मुख्य विपक्षी दल कॉंग्रेस ने 7 दिग्गजों के नामों की घोषणा कर अपनी चुनावी रणनीति साफ कर दी है। राजनीतिक गलियारों में लंबे समय से चल रही खींचतान और कयासों पर विराम लगाते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा और वरिष्ठ नेता मंसूर अली खान को कर्नाटक से चुनावी मैदान में उतारा गया है। इसके अलावा मध्य प्रदेश से मीनाक्षी नटराजन और राजस्थान से नीरज डांगी को मौका देकर पार्टी ने क्षेत्रीय संतुलन साधने का प्रयास किया है। दक्षिण भारत के महत्वपूर्ण राज्य तमिलनाडु से नीतिगत मामलों के जानकार प्रवीण चक्रवर्ती और झारखंड से प्रणव झा के नामों पर मुहर लगाकर पार्टी नेतृत्व ने जमीनी और वफादार सिपाहियों को आगे बढ़ाने का स्पष्ट संकेत दिया है।
वरिष्ठ नेताओं को अग्रिम पंक्ति में लाने की नई रणनीति
संसदीय राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पार्टी आलाकमान ने इस बार बेहद सोच-समझकर चेहरों का चयन किया है। कर्नाटक से घोषित किए गए तीनों नाम राजनीतिक रूप से बेहद रसूखदार हैं। मल्लिकार्जुन खरगे का अनुभव, पवन खेड़ा की आक्रामक तार्किकता और मंसूर अली खान की मजबूत क्षेत्रीय पकड़ को एक साथ लाकर दक्षिणी दुर्ग को और मजबूत करने की कोशिश की गई है। इस फैसले से साफ है कि आने वाले समय में सदन के भीतर सरकार को घेरने के लिए केवल अनुभवी और मुखर आवाज वाले नेताओं को ही प्राथमिकता दी जाएगी।
क्षेत्रीय संतुलन के साथ युवा और नीतिगत चेहरों को तरजीह
घोषित की गई सूची में केवल बड़े नाम ही नहीं हैं, बल्कि विभिन्न राज्यों में सांगठनिक संतुलन बनाने का भी पूरा ध्यान रखा गया है। मध्य प्रदेश से पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी को महिला प्रतिनिधित्व और साफ-सुथरी छवि से जोड़कर देखा जा रहा है। राजस्थान से नीरज डांगी को दोबारा मौका देना दलित समीकरणों को साधने की कवायद माना जा रहा है। तमिलनाडु से प्रवीण चक्रवर्ती को आगे बढ़ाना इस बात का प्रमाण है कि पार्टी आर्थिक और नीतिगत विषयों पर देश के सामने अपनी मजबूत पकड़ दिखाना चाहती है। झारखंड से प्रणव झा का नाम सांगठनिक वफादारी का इनाम माना जा रहा है। इस पूरी सूची से साफ संदेश जाता है कि पार्टी अब अंदरूनी कलह से दूर केवल जीतने योग्य और प्रभावशाली चेहरों पर ही भरोसा करेगी।
