अफसर ने निकाली पेड पार्किंग की ट्रिक,पब्लिक की चिंता किसी को नहीं, संस्कारधानी को महानगर बनाने के अपने की खौफनाक हकीकत

जबलपुर। यातायात के लगातार बढ़ते दबाव के बीच नगर निगम प्रशासन शहर के आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं देने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। शहर के व्यस्त व्यावसायिक इलाकों और बाजारों में अब राहगीरों के लिए पैदल चलना भी दूभर होने वाला है। नगर निगम प्रशासन अपनी खाली हो चुकी जेब को भरने के लिए जनता के पैसों से बनी सड़कों और फुटपाथों को पेड पार्किंग के रूप में तब्दील करने की तैयारी में है। इसके लिए बाकायदा 7 प्रमुख इलाकों को चिह्नित भी कर लिया गया है, जिनमें बालाजी गमला स्टैंड से महापौर बंगले तक, सतना बिल्डिंग से रोड के दूसरी ओर, मॉडल रोड सेंट नाबर्ट स्कूल साइड, निगम मुख्यालय के सामने सिविक सेंटर, समदड़िया माल के तीनों तरफ, श्याम टाकीज से गोलबाजार तक और गोलबाजार के चारों तरफ की सड़कें व फुटपाथ शामिल हैं। एक तरफ शहर को महानगर बनाने का दावा किया जा रहा है, तो दूसरी तरफ जनता की पैदल चलने की जगह को ही बेचा जा रहा है।
कमाई की खातिर सड़कों को समेटने की तैयारी
नगर निगम का यह फैसला साफ तौर पर उसकी राजस्व बढ़ाने की भूख को दर्शाता है। सड़कों और फुटपाथों का निर्माण आम जनता के टैक्स के पैसों से उनके सुगम आवागमन के लिए किया गया था। अब उन्हीं सड़कों को संकुचित करके वहां गाड़ियां खड़ी करने के बदले पैसे वसूले जाएंगे। जानकारों का मानना है कि इस कदम से पहले से ही जाम की समस्या से जूझ रहे इन बाजारों में स्थिति और ज्यादा बदतर हो जाएगी। जब सड़कों का एक बड़ा हिस्सा पार्किंग के नाम पर ब्लॉक हो जाएगा, तो वाहनों और पैदल चलने वालों के लिए जगह ही नहीं बचेगी।
अपनी खाली जमीनों को खंगालने में नाकाम तंत्र
निगम प्रशासन अपनी अक्षमता को छुपाने के लिए यह तर्क दे रहा है कि शहर के मुख्य बाजारों में अब पार्किंग बनाने के लिए कोई जमीन ही शेष नहीं बची है। जबकि हकीकत यह है कि अगर नगर निगम अपनी खुद की संपत्तियों और भूखंडों का सही तरीके से सर्वे करे, तो उसे आज भी कई जगहों पर बड़ी खाली जमीन मिल सकती है। अपनी खाली जमीनों का सही प्रबंधन करने के बजाय सीधे सड़कों पर कब्जा करके पार्किंग शुल्क वसूलना सबसे आसान रास्ता चुनना है, जो कि पूरी तरह से जनता के हितों के खिलाफ है।
महानगर के बड़े दावों के बीच जमीनी हकीकत
एक तरफ शहर के नीति नियंता और जनप्रतिनिधि लगातार इसे महानगर का स्वरूप देने के बड़े-बड़े वादे कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बुनियादी व्यवस्थाओं के नाम पर जनता को प्रताड़ित किया जा रहा है। कोई भी शहर सड़कों को बेचकर या पैदल चलने वालों की राह रोककर महानगर नहीं बन सकता। यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए कड़े कदम उठाने के बजाय, सड़कों को ही पार्किंग लॉट में बदल देना नगर निगम की प्रशासनिक विफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है। इससे आम जनता में भारी आक्रोश पनप रहा है।
