जबलपुर: कलेक्टर-सीईओ को बिना बताए डीपीसी ने बांट दी बीआरसी की मलाईदार पोस्ट,शिक्षकों की ट्रेनिंग भी ठेंगे से

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Newzo - News Editor 67 Views
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जबलपुर ग्रामीण बीआरसी पद पर अवैध कब्जा, डीपीसी योगेश शर्मा की कार्यप्रणाली पर सवाल,बिना इंटरव्यू सीधे मिली कुर्सी, जबलपुर जिला शिक्षा विभाग का अनोखा कारनामा

जबलपुर। जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान डाइट के लेक्चरर केशव दुबे को जबलपुर ग्रामीण ब्लॉक रिसोर्स कोआर्डिनेटर यानी बीआरसी का प्रभार नियम विरुद्ध तरीके से सौंपे जाने का गंभीर मामला सामने आया है। शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार ग्रामीण बीआरसी के पद पर नियुक्ति के लिए बाकायदा इंटरव्यू की प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिसमें जिला पंचायत सीईओ या कलेक्टर स्तर के उच्च अधिकारी चयन करते हैं। इसके विपरीत जिला परियोजना समन्वयक यानी डीपीसी कार्यालय जबलपुर ने चयन की किसी भी पारदर्शी प्रक्रिया का पालन नहीं किया और सीधे केशव दुबे को बीआरसी के पद पर नियुक्त कर दिया। पिछले ढाई साल से केशव दुबे बिना किसी वैध प्रक्रिया के इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद पर जमे हुए हैं, जबकि उनकी मूल जिम्मेदारी डाइट संस्थान में आने वाले डी.एड प्रशिक्षणार्थियों को पढ़ाने की है। एक अधिकारी बीआरसी के भारी-भरकम प्रशासनिक दायित्वों को संभालते हुए डाइट में अध्यापन का कार्य किसी भी स्थिति में पूरा नहीं कर सकता है। इस कारण दूर-दराज के गांवों से डी.एड की ट्रेनिंग लेने आने वाले शिक्षकों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है। इस गंभीर विसंगति के बारे में जबलपुर जिले के डीपीसी योगेश शर्मा को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन उन्होंने इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। डीपीसी ने उच्च अधिकारियों को विश्वास में लिए बिना और चयन प्रक्रिया को पूरी तरह दरकिनार कर यह नियुक्ति की है। इस पूरे मामले पर डीपीसी योगेश शर्मा से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया। अब परेशान डी.एड प्रशिक्षणार्थियों ने उच्च अधिकारियों से इस व्यवस्था को तुरंत बदलने की मांग की है।

​डीपीसी कार्यालय ने नियम ताक पर रखकर दी नियुक्ति

​शिक्षा विभाग के स्थापित नियमों को दरकिनार कर जबलपुर ग्रामीण में बीआरसी की कुर्सी सौंप दी गई। इस पद के लिए अनिवार्य इंटरव्यू की प्रक्रिया को पूरी तरह गायब कर दिया गया। उच्च अधिकारियों की भूमिका को खत्म कर डीपीसी कार्यालय ने सीधे अपने स्तर पर यह फैसला ले लिया। पिछले ढाई साल से चल रही इस अवैध व्यवस्था के कारण विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

​डाइट के डी-एड प्रशिक्षणार्थियों की पढ़ाई हो रही प्रभावित

​लेक्चरर का मुख्य काम जिले के भावी शिक्षकों को बेहतर प्रशिक्षण देना है। बीआरसी पद की व्यस्तताओं के चलते डाइट संस्थान के डी.एड छात्रों की कक्षाएं नियमित रूप से नहीं लग पा रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले शिक्षक यहां अधूरी ट्रेनिंग के सहारे वापस लौट रहे हैं। एक साथ दो बड़े पदों की जिम्मेदारी संभालने की जिद ने पूरी शिक्षा व्यवस्था को बेपटरी कर दिया है।

​उच्च अधिकारियों को अंधेरे में रखकर किया पूरा खेल

​इस पूरे मामले में जिले के जिम्मेदार डीपीसी योगेश शर्मा की भूमिका पर उंगलियां उठ रही हैं। बार-बार शिकायत मिलने के बाद भी उन्होंने इस गड़बड़ी को सुधारने का कोई प्रयास नहीं किया। कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ जैसे उच्च अधिकारियों को इस प्रशासनिक फेरबदल की सही जानकारी तक नहीं दी गई। मामले के तूल पकड़ने के बाद अब जिम्मेदार अधिकारी इस विषय पर बात करने से बच रहे हैं।

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