
मंत्रालय के बड़े अफसरों से पहचान का झूठा नाटक कर जाल में फंसाया,बेटों के भविष्य के लिए दोस्तों और रिश्तेदारों से उधार ली थी रकम,अलग-अलग किस्तों में बैंक खातों के माध्यम से हुआ लाखों का लेनदेन
सागर। नगर निगम के रिटायर्ड इंजीनियर को उनके दो बेटों की सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा देकर 10 लाख 60 हजार रुपये की बड़ी धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। सागर के सिविल लाइन थाना पुलिस ने पीड़ित सेवानिवृत्त इंजीनियर पूरन अहिरवार की लिखित शिकायत पर कार्रवाई करते हुए नगर निगम के एक कर्मचारी, एक उपयंत्री और भोपाल निवासी एक बिचौलिए सहित कुल 3 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। मामले में नामजद आरोपियों की पहचान सागर निवासी अहफाज पिता इसरार हुसैन, रायगढ़ नगर निगम में पदस्थ उपयंत्री आरिफ पिता एजाज हुसैन और भोपाल निवासी मुजीब खान के रूप में हुई है। इन आरोपियों ने मंत्रालय के बड़े अधिकारियों से अपनी सीधी पहुंच का झूठा दावा किया था। उन्होंने पूरन अहिरवार के बेटों योगेश और जितेंद्र को नगर निगम में इंजीनियर के पद पर नियुक्त कराने का भरोसा दिया और अलग-अलग किस्तों में कुल 10 लाख 60 हजार रुपये ऐंठ लिए।
नौकरी का झांसा और आरोपियों का जाल
पीड़ित सेवानिवृत्त इंजीनियर पूरन अहिरवार की मुलाकात सागर में ही नगर निगम के कर्मचारी अहफाज और रायगढ़ में पदस्थ उपयंत्री आरिफ से हुई थी। इन दोनों ने खुद को रसूखदार बताते हुए पूरन को भरोसा दिलाया कि भोपाल के मुजीब खान नामक व्यक्ति के जरिए उनकी शासन के उच्च अधिकारियों तक सीधी पहुंच है। उन्होंने दावा किया कि वे नगर निगम में खाली पड़े तकनीकी पदों पर उनके दोनों बेटों की पक्की सरकारी नौकरी लगवा देंगे। इसके बदले उन्होंने अधिकारियों को पहले एडवांस भुगतान करने की बात कही ताकि नियुक्ति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। आरोपियों के इस झांसे में आकर पीड़ित अपने बेटों का भविष्य संवारने के लिए उनके जाल में फंस गया और अपने बच्चों के सभी जरूरी दस्तावेज आरोपियों को सौंप दिए।
बैंक खातों में लाखों रुपयों का लेनदेन
भरोसा होने के बाद पीड़ित ने पहली बार 10 दिसंबर 2024 को आरोपियों द्वारा बताए गए बैंक खाते में 5 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद आरोपियों ने प्रशासनिक खर्च और अधिकारियों को अतिरिक्त राशि देने के नाम पर और पैसों का दबाव बनाना शुरू कर दिया। पीड़ित ने अपने बेटों के रोजगार के लिए रिश्तेदारों और परिचितों से उधार लेकर अलग-अलग तारीखों में 2 लाख, 1 लाख, 2 लाख, 40 हजार, 5 हजार और 15 हजार रुपये जमा किए। इस तरह अलग-अलग किस्तों में कुल 10 लाख 60 हजार रुपये आरोपियों के बैंक खातों में पहुंचा दिए गए। रकम हासिल करने के बाद आरोपियों ने पीड़ित को पूरी तरह से आश्वस्त कर दिया कि अब उनका काम पूरी तरह पक्का हो चुका है।
फर्जी सोशल मीडिया मैसेज से धोखा
रकम हड़पने के बाद आरोपियों ने पीड़ित को गुमराह करने के लिए एक नया तरीका अपनाया। 20 दिसंबर 2024 को सोशल मीडिया के एक ग्रुप पर आरोपियों ने एक फर्जी संदेश भेजा, जिसमें दावा किया गया कि पूरन अहिरवार के दोनों बेटों का चयन हो चुका है। इस संदेश में यह भी लिखा था कि एक बेटे की पदस्थापना खुरई में तय हो गई है और उनके आधिकारिक नियुक्ति आदेश बहुत जल्द जारी कर दिए जाएंगे। जब काफी समय बीतने के बाद भी वास्तविक नियुक्ति पत्र नहीं मिला, तो पीड़ित ने आरोपियों से संपर्क किया। आरोपी लगातार कभी अधिकारियों के बाहर होने तो कभी प्रशासनिक प्रक्रिया लंबी होने का बहाना बनाकर समय टालते रहे। जुलाई 2025 में आरोपियों ने सोशल मीडिया पर मैसेज भेजकर पैसे लौटाने का वादा भी किया, लेकिन एक भी रुपया वापस नहीं किया।
पुलिस जांच के बाद मुकदमा दर्ज
जब पीड़ित को समझ आ गया कि उसके साथ ठगी हुई है, तो उसने सिविल लाइन थाने में आरोपियों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस को बैंक खातों में ट्रांसफर की गई राशि के दस्तावेज और मोबाइल पर आए फर्जी मैसेज के सबूत सौंपे गए। पुलिस ने शुरुआती जांच के बाद पाया कि यह कोई सामान्य मामला नहीं है, बल्कि सीधे-सीधे एक संगठित गिरोह का काम है जो बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाता है। पुलिस ने करीब 6 महीने की विस्तृत जांच प्रक्रिया पूरी करने के बाद तीनों नामजद आरोपियों अहफाज, आरिफ और मुजीब खान के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य संबंधित कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है और अब आरोपियों की तलाश की जा रही है।
