देशप्रेम और मानवीय मूल्यों को शब्दों में पिरोकर रचनाकार ने रचा नया इतिहास, शिक्षाविदों और गणमान्य नागरिकों की मौजूदगी में पुस्तकों पर हुई गंभीर चर्चा


जबलपुर। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शासकीय महाकौशल महाविद्यालय में आज पूर्व छात्र संघ के सहयोग से एक भव्य साहित्यिक समारोह का आयोजन किया गया। इस गौरवमयी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में केंट जबलपुर के विधायक अशोक रोहाणी उपस्थित रहे, जबकि अध्यक्षता जबलपुर के विधायक डॉ. अभिलाष पाण्डेय ने की। सारस्वत अतिथियों में प्राचार्य डॉ. अलकेश चतुर्वेदी, डॉ. इला घोष, प्रो. अरुण शुक्ल और डॉ. शिवकुमार सिंह ठाकुर शामिल हुए, जिन्होंने प्रसिद्ध रचनाकार श्री राधाकृष्ण पाण्डेय के दो नवीन काव्य संग्रहों गीता दोहावली तथा नमो काव्य मंजरी का गरिमामय विमोचन किया। इस अवसर पर कार्यक्रम का कुशल संचालन श्री विवेक पाठक ने किया और अंत में डॉ. मनीष दुबे ने सभी आगंतुकों के प्रति आभार जताया।
सांस्कृतिक चेतना और नई पीढ़ी को भारतीय जीवन मूल्यों से जोड़ने का अनूठा प्रयास
इस भव्य समारोह की शुरुआत में सभी मंचासीन अतिथियों का पुष्पगुच्छ, शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट कर आदरपूर्वक स्वागत किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि अशोक रोहाणी ने कहा कि गीता दोहावली जैसी उत्कृष्ट रचनाएं हमारी नई पीढ़ी को भारतीय जीवन मूल्यों, गौरवशाली संस्कृति और उच्च संस्कारों से जोड़ने में एक अत्यंत महत्वपूर्ण माध्यम साबित होंगी। उन्होंने लेखक के निरंतर साहित्यिक योगदान की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए कहा कि ऐसी सकारात्मक कृतियाँ समाज को एक सही और वैचारिक दिशा प्रदान करने का काम करती हैं। इस उत्सव में साहित्य, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र की अनेक गणमान्य और प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा को और अधिक बढ़ा दिया।
राष्ट्रप्रेम और मानवीय संवेदनाओं को सशक्त अभिव्यक्ति देती नई रचनाएं
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विधायक डॉ. अभिलाष पाण्डेय ने अपने उद्बोधन में कहा कि नमो काव्य मंजरी जैसी कालजयी रचनाएँ देश में राष्ट्रप्रेम, सामाजिक चेतना और उत्कृष्ट मानवीय मूल्यों को एक बेहद सशक्त अभिव्यक्ति प्रदान करती हैं। उन्होंने सृजनकार को अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए साहित्य लेखन को उन्नत समाज के निर्माण का सबसे प्रभावी और मजबूत स्तंभ बताया। समारोह में उपस्थित सभी प्रबुद्ध वक्ताओं ने श्री राधाकृष्ण पाण्डेय के समृद्ध साहित्यिक अवदान की भूरि-भूरि प्रशंसा की और उनकी दोनों ही नवीन कृतियों को आम जनमानस के लिए बेहद प्रेरणादायी और संग्रहणीय बताया।
साहित्यिक समीक्षकों द्वारा दोनों पुस्तकों के रस और शिल्प सौंदर्य का गहरा विश्लेषण
उत्सव के दौरान दोनों नवीन पुस्तकों की विस्तृत और गंभीर समीक्षा प्रस्तुत की गई। विदुषी डॉ. इला घोष ने गीता दोहावली की साहित्यिक, दार्शनिक और आध्यात्मिक विशेषताओं पर बहुत ही सरल ढंग से प्रकाश डाला। वहीं दूसरी ओर डॉ. शिवकुमार सिंह ठाकुर ने नमो काव्य मंजरी की कविताओं में समाहित रस, भाव, भाषा शैली और शिल्प सौंदर्य का बहुत सुंदर विश्लेषण किया। इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनने के लिए बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक, शिक्षाविद् और कॉलेज के पूर्व छात्र जैसे डॉ. प्रशांत मिश्रा, आदित्य मिश्रा, मृदुल मिश्रा, डॉ रश्मि टंडन, मनीष पांडे, मनोज परोहा, सुरेंद्र सेन, उमा श्रीवास्तव, श्री तरुण रोहितास और प्रेम शुक्ला उपस्थित रहे। साथ ही महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक, कर्मठ कर्मचारी और उत्साही विद्यार्थी भी इस पल के साक्षी बने।
