
बारिश में बह जाएंगी आधी-अधूरी सड़कें, पर नेता अपनी मर्जी के मालिक, निगम के वित्तीय एडजस्टमेंट के प्रस्ताव को भी रसूखदार ने किया खारिज
जबलपुर। जबलपुर नगर निगम में ठेकेदारी और राजनीति में एक साथ दखल रखने वाले एक रसूखदार नेता की मनमानी के कारण शहर की करीब 18 प्रमुख सड़कों का डामरीकरण काम पूरी तरह ठप हो गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे युद्ध के कारण डामर की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिसे आधार बनाकर इस रसूखदार ठेकेदार ने काम बंद कर दिया है। जबलपुर नगर निगम प्रशासन और महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू ने ठेकेदार को राहत देते हुए बची हुई सड़कों के निर्माण में डामर की बढ़ी हुई कीमतों के अंतर का वित्तीय तालमेल यानी एडजस्टमेंट करने क भरोसा भी दिया है, लेकिन इसके बावजूद संबंधित ठेकेदार नेता काम शुरू करने को राजी नहीं हैं। निगमायुक्त राम प्रकाश अहिरवार और अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी इस रसूखदार राजनेता के सियासी रसूख के आगे पूरी तरह बेबस नजर आ रहे हैं, जिसके कारण कोई भी जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में आधिकारिक तौर पर कुछ भी बोलने का साहस नहीं जुटा पा रहा है। आगामी मानसून सीजन सिर पर होने के कारण अब शहर की जनता को गड्ढों और अधूरी सड़कों के बीच बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
डामर के बढ़े दामों पर निगम के समझौते को भी ठुकराया
वैश्विक युद्ध के हालातों की वजह से डामर के दामों में अचानक आई तेजी को ठेकेदार नेता ने अपना मुख्य हथियार बना लिया है। नगर निगम प्रबंधन ने शहर विकास और जनहित को ध्यान में रखते हुए नियमों में ढील दी और डामर की बढ़ी हुई कीमतों का अतिरिक्त भुगतान करने का प्रस्ताव भी ठेकेदार के सामने रखा। इसके बाद भी राजनीतिक रसूख के मद में चूर नेता अपनी मनमानी शर्तों पर अड़े हुए हैं। डामर की कीमतों में फिलहाल वैश्विक स्तर पर किसी भी तरह की गिरावट आने के आसार नहीं हैं, जिससे यह साफ है कि आने वाले दिनों में भी इस गतिरोध का समाधान आसानी से नहीं निकलेगा।
जनता की मुसीबत,अधिकारियों की लाचारी आई सामने
इस पूरे सियासी और व्यापारिक घटनाक्रम का सबसे दुखद पहलू यह है कि जबलपुर की आम जनता को इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। मानसून की दस्तक बेहद करीब है और अगर इस स्थिति में सड़कों पर डामर की परत नहीं बिछाई गई, तो बची-खुची सड़कें भी पहली बारिश के पानी में पूरी तरह बह जाएंगी। नगर निगम के तकनीकी अधिकारी दबी जुबान में इस विफलता को स्वीकार कर रहे हैं, लेकिन ठेकेदार की ऊंची राजनीतिक पहुंच और रसूख के कारण वे सीधे तौर पर कोई भी दंडात्मक कार्रवाई करने या उनका ठेका निरस्त करने से कतरा रहे हैं।
दोहरे मापदंड और ठेकेदार नेता के सियासी तेवर
एक तरफ जहां यह ठेकेदार नेता अपनी व्यावसायिक जिम्मेदारी से पल्ला झाड़कर शहर को विकास के मामले में पीछे धकेल रहा है, वहीं दूसरी तरफ वह शहर के अन्य सार्वजनिक मुद्दों पर जनता का मसीहा बनने का ढोंग भी कर रहे हैं। यह नेता आए दिन जनहित के अन्य मसलों को लेकर निगमायुक्त और जिला प्रशासन के सामने विरोध प्रदर्शन करते हुए इंसाफ की आवाज बुलंद करते रहते हहैं। इस दोहरे चरित्र के कारण नगर निगम प्रशासन बेहद असहज स्थिति में है, क्योंकि जो व्यक्ति खुद व्यवस्था को बंधक बनाए बैठा है, वही व्यवस्था सुधारने के लिए अधिकारियों पर दबाव बना रहे हैं।
