रेत माफिया के आगे सिस्टम नतमस्तक, सात माह से सरकारी खजाने को लग रहा चूना, ऊपर तक पहुंच रही मलाई

Newzo
Newzo - News Editor 58 Views
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जबलपुर। जिले में खनन माफिया इस कदर बेलगाम हो चुका है कि प्रशासनिक अमला मूकदर्शक बना बैठा है और मलाई ऊपर तक पहुंच रही है। नवंबर 2025 से वैध खदानें बंद हैं, जिससे सरकार को करोड़ों का नुकसान हो रहा है, लेकिन रक्षक ही भक्षक बनकर चुप बैठे हैं। जिला खनिज अधिकारी एके राय के दावों के उलट बेलखाड़ू, बरगी, सिहोरा और चरगंवा में माफिया बेखौफ है। एनजीटी से पास 31 खदानों का साढ़े 16 करोड़ का टेंडर जानबूझकर उलझाया गया ताकि अवैध कमाई का खेल चलता रहे। 5 लाख घनमीटर रेत की सरकारी नीलामी फेल होने के पीछे अफसरों और माफिया की बड़ी सांठगांठ है, जिसकी फाइलें अब भोपाल तलब हुई हैं।

​अफसरों की शह पर नदियों का सीना चीर रहा माफिया

​तीन बार टेंडर प्रक्रिया जानबूझकर इस तरह फेल कराई गई ताकि ठेकेदार दूरी बनाए रखें और माफिया राज कायम रहे। रात होते ही नर्मदा, हिरण और गौर नदी में पोकलेन और हाइवा उतर जाते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन की नाक के नीचे रातभर ट्रैक्टर दौड़ रहे हैं, क्योंकि हर गाड़ी के हिसाब से तय कमीशन ऊपर तक जा रहा है।

​जनता की जेब पर डाका, 30 हजार पार हुआ दाम

​वैध खदानें बंद रखकर बाजार में रेत की कृत्रिम किल्लत पैदा कर दी गई है। जबलपुर में जो रेत आसानी से मिलनी चाहिए थी, उसके दाम अब 28 से 30 हजार रुपए प्रति हाइवा पहुंच चुके हैं। पड़ोसी जिले कटनी में तो यह आंकड़ा 50 हजार रुपए छू रहा है। आम आदमी का घर बनाना दूभर हो चुका है और जिम्मेदार आंखें मूंदकर बैठे हैं।

​सांठगांठ छिपाने के लिए अब नियमों को बदलने का खेल

​जब पानी सिर से ऊपर चला गया, तो अब ठीकरा नियमों पर फोड़ा जा रहा है। माफिया को फायदा पहुंचाने के लिए अब उत्खनन की सीमा 5 लाख से घटाकर साढ़े 3 लाख घनमीटर करने की तैयारी है। दिखावे के लिए कुछ जगहों पर रेत जब्त कर बहाई गई है, लेकिन असली सरगनाओं पर हाथ डालने से अधिकारी आज भी कतरा रहे हैं।

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