विकास योजनाओं के लिए मप्र खोजेगा नए वित्तीय स्रोत, मंत्री के नेतृत्व में 66 सौ करोड़ के मॉडल का अध्ययन

जबलपुर। मध्य प्रदेश में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने महाराष्ट्र और गुजरात का दौरा कर बुनियादी ढांचे के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। इस यात्रा के दौरान गांधीनगर के भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं भू-सूचना संस्थान के साथ तकनीकी सहयोग पर गहन चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल सहित दोनों राज्यों के आला अधिकारियों से मुलाकात की। इस महत्वपूर्ण टीम में लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव सुखबीर सिंह, मप्र सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक भारत यादव, भवन विकास निगम के प्रबंध संचालक सिबी चक्रवर्ती, प्रमुख अभियंता केपीएस राणा तथा एसआर बघेल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य दोनों राज्यों के सफल वित्तीय और तकनीकी मॉडलों को मध्य प्रदेश में लागू करना है।
इंसीडेंट रिपोर्टिंग सिस्टम: मोबाइल एप से होगी त्वरित निगरानी
सड़क और पुल निर्माण कार्यों की पारदर्शिता और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए प्रदेश में अत्याधुनिक डिजिटल तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। निर्माण स्थलों पर होने वाली किसी भी अप्रिय घटना या तकनीकी खराबी की सीधी जानकारी तत्काल मंत्री कार्यालय तक पहुंचाने के लिए एक विशेष इंसीडेंट रिपोर्टिंग सिस्टम तैयार किया जा रहा है। इसके तहत एक नया मोबाइल एप विकसित किया जाएगा, जिसमें विभागीय इंजीनियर कार्यस्थल से सीधे फोटो, भौगोलिक लोकेशन और संबंधित तकनीकी डाटा अपलोड कर सकेंगे। इस व्यवस्था से मार्ग धंसने, पुलों को नुकसान बढ़ने या अचानक होने वाली दुर्घटनाओं जैसी आपातकालीन स्थितियों पर तुरंत एक्शन लिया जा सकेगा। इस पूरे डिजिटल सिस्टम का प्रारंभिक ट्रायल 20 जून तक पूरा कर लिया जाएगा, जबकि 1 जुलाई से इसे पूरे प्रदेश में पूरी तरह से सक्रिय कर दिया जाएगा।
टोल राजस्व आधारित वित्तीय मॉडल ,वैज्ञानिक समय-सीमा का निर्धारण
मध्य प्रदेश सरकार अब राज्य की बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए नए और नवाचारी वित्तीय विकल्पों को अपनाने की तैयारी कर रही है। अध्ययन यात्रा के दौरान मध्य प्रदेश के दल ने महाराष्ट्र के सफल वित्तीय ढांचे का विश्लेषण किया। अधिकारियों ने मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे की 6600 करोड़ रुपए की लागत वाली मिसिंग लिंक परियोजना और प्रसिद्ध अटल सेतु के निर्माण में अपनाए गए टोल राजस्व आधारित मॉडल को बारीकी से समझा। लोक निर्माण मंत्री ने स्पष्ट किया है कि भविष्य की बड़ी योजनाओं के लिए मध्य प्रदेश भी ऐसे आत्मनिर्भर आर्थिक मॉडलों पर काम करेगा। इसके साथ ही अब प्रदेश में सड़कों और पुलों के निर्माण की समय-सीमा का निर्धारण पारंपरिक तरीकों के बजाय वैज्ञानिक आधार पर होगा। इसके लिए निर्माण सामग्री, आधुनिक तकनीक, मिट्टी की गुणवत्ता और स्थानीय मौसम की परिस्थितियों का पूरा आकलन किया जाएगा।
अंतर्राज्यीय सड़कों का साझा विकास,दुर्घटना क्षेत्रों का डिजिटल मूल्यांकन
आर्थिक और पर्यटन गतिविधियों को रफ्तार देने के लिए मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच सीमावर्ती क्षेत्रों की सड़कों को संयुक्त रूप से विकसित करने पर पूर्ण सहमति बनी है। इसके लिए एमपीआरडीसी और एमएसआरडीसी की टीमें मिलकर एक व्यापक संयुक्त कार्ययोजना तैयार करेंगी, जिससे दोनों राज्यों के बीच व्यापारिक परिवहन सुगम हो सकेगा। इसके साथ ही, सड़कों की बनावट और प्रमुख चौराहों की ज्योमेट्री का भारतीय सड़क कांग्रेस के तय मानकों के अनुसार पूरी तरह से डिजिटल मूल्यांकन किया जाएगा। इस तकनीक से सड़क हादसों के लिए जिम्मेदार ब्लैक स्पॉट्स की पहचान कर उन्हें समय रहते ठीक किया जा सकेगा। जल संरक्षण की दिशा में भी एक अनोखा प्रयास करते हुए पीएम गतिशक्ति पोर्टल के भूजल और भू-स्थानिक आंकड़ों का उपयोग किया जाएगा, जिससे सड़क किनारे रिचार्ज बोर बनाकर वाटर हार्वेस्टिंग की जाएगी।
