
नागरिक उपभोक्ता मंच के सदस्यों ने राज्य सरकार की लंबी चुप्पी पर जताई निराशा
जबलपुर। उत्तर प्रदेश की तरह मध्यप्रदेश में भी बिजली उपभोक्ताओं से फ्यूल सरचार्ज की वसूली पर रोक लगाने की मांग तेज हो गई है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच जबलपुर ने आज मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के सचिव को ईमेल भेजकर यह अपील की है। इसकी एक प्रति ऊर्जा मंत्रालय के सचिव को भी भेजी गई है। मंच के डॉ पी जी नाजपांडे ने बताया कि मार्च में फ्यूल सरचार्ज 0 प्रतिशत था जिसे अप्रैल में बढ़ाकर 5.36 प्रतिशत और मई जून में 3.91 प्रतिशत कर दिया गया। इसके साथ ही 1 अप्रैल से बिजली के रेट में भी 4.8 प्रतिशत की वृद्धि लागू कर दी गई है। उत्तर प्रदेश बिजली आयोग द्वारा 1 जून को सरचार्ज पर रोक लगाने के बाद प्रदेश में भी यह मांग उठी है। इस भारी आर्थिक बोझ से गरीब और मध्यम वर्ग काफी परेशान है। अपील करने वालों में डॉ पी जी नाजपांडे के साथ रजत भार्गव, एडवोकेट वेदप्रकाश अधौलिया, सुशीला कन्नौजिया, गीता पांडे और डी आर लखेरा शामिल हैं।
यूपी सरकार के कदम से मिली नई उम्मीद
उत्तर प्रदेश बिजली आयोग ने 1 जून को बढ़े हुए फ्यूल सरचार्ज की वसूली पर रोक लगाते हुए वहां की बिजली कंपनी से जवाब मांगा है। विद्युत अधिनियम की धारा 108 के तहत उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने राज्य के आयोग को सीधे निर्देश जारी किए हैं। इसी को आधार बनाते हुए नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने मध्यप्रदेश सरकार और बिजली आयोग से भी अपने वैधानिक अधिकारों का उपयोग करने की मांग की है। मंच का स्पष्ट कहना है कि मध्यप्रदेश सरकार इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर अभी तक मौन है जबकि उसे भी यूपी सरकार की तरह जनता के हित में तत्काल प्रभाव से कदम उठाने चाहिए।
आम जनता के बजट पर पड़ रहा सीधा असर
फ्यूल सरचार्ज और बिजली की दरों में एक साथ की गई इस बढ़ोतरी का सीधा असर आम उपभोक्ताओं के मासिक बिल पर पड़ रहा है। हर महीने बिजली बिलों के रूप में लोगों से भारी राशि वसूली जा रही है जिससे आम आदमी के घर का बजट पूरी तरह से बिगड़ गया है। उपभोक्ता मंच के सदस्यों का कहना है कि जब तक राज्य सरकार और नियामक आयोग इस मामले में दखल नहीं देते तब तक प्रदेश की जनता को कोई राहत नहीं मिलेगी। इसलिए यह आवश्यक है कि मई और जून के फ्यूल सरचार्ज की वसूली को तुरंत प्रभाव से निरस्त किया जाए ताकि मध्यम वर्गीय परिवारों को इस आर्थिक संकट से बचाया जा सके।
