
जबलपुर। नूतन मराठी स्कूल गोल बाजार में वर्तिका संस्था की मासिक काव्य गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर मुख्य अतिथि वसंत शर्मा, अध्यक्ष संतोष नेमा, महामहोपाध्याय आचार्य डॉक्टर हरिशंकर दुबे, डॉ. अनिल कोरी और विजेंद्र उपाध्याय की गरिमामयी उपस्थिति में वरिष्ठ रचनाकार सतीश श्रीवास्तव एवं दीपक तिवारी के काव्य पटल का विमोचन हुआ। दोनों साहित्यकारों को शाल, श्रीफल और मानपत्र सौंपकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में विजय नेमा अनुज ने संस्था के कार्यों को रेखांकित किया, जबकि मुख्य वक्ता राजेश पाठक प्रवीण ने बताया कि शहीद स्मारक प्रांगण में पिछले 15 वर्षों से रचनाकारों के जन्मदिवस पर काव्य पटल लगाने की यह गौरवशाली परंपरा निरंतर जारी है। कार्यक्रम का सफल संचालन सुनील तोमर ने किया और श्रीमती सिद्धेश्वरी सराफ ने मधुर स्वर में सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। गोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने समसामयिक लेखन को साहित्य की असली सार्थकता बताते हुए कहा कि कविता समाज की पीड़ा और बदलते समय का सच्चा आईना होती है, जो आज के इस तकनीकी युग में लोगों को आपस में जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम है।
समसामयिक रचनाओं संग बुंदेली गजलों के जरिए बिखरे विविध रंग
गोष्ठी के दूसरे सत्र में उपस्थित कवियों ने पर्यावरण, माता-पिता के प्रति आदर और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी एक से बढ़कर एक प्रभावी रचनाएं प्रस्तुत कीं। काव्य पाठ करने वाले प्रमुख साहित्यकारों में नरेश जैन, विवेक गुप्ता, प्रेमचंद पालीवाल, सुवीर श्रीवास्तव, गणेश श्रीवास्तव, सोहन सलिल, देवदर्शन, सलिल तिवारी, महब जबलपुरी, गुप्तेश्वर द्वारका, निर्मला तिवारी, डॉ सुनीता गुप्ता, ज्योति प्यासी, रजनी कोठारी, विनीता पैगवार, तरुना खरे, निर्मला श्रीवास्तव, मीना कुरील, डॉ छाया सिंह, नीता सिंह, अमर सिंह वर्मा, यशो वर्धन पाठक, विजय विश्वकर्मा, वंदना सोनी, अनुराधा गर्ग, उर्मिला श्रीवास्तव, डॉ कामना कौस्तुभ, विजय सिन्हा, डॉ मीना भट्ट, प्रभा खरे, कुंजीलाल चक्रवर्ती, लखन लाल रजक, प्रकाश ठाकुर, सुभाष मनी बैरागी और विवेक नेमा शामिल थे। इन रचनाकारों ने अपनी कविताओं और बुंदेली गजल के माध्यम से मां के आंचल की छांव, आधुनिक जीवन की फ्रेंड रिक्वेस्ट की उलझन, इंसानियत के गिरते स्तर और समाज के यथार्थ पर गहरी चोट की। कार्यक्रम के अंत में लखन लाल रजक ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। इस दौरान डॉ पुरुषोत्तम भट्ट, दिवाकर शर्मा, रमाकांत गौतम, शेखर शर्मा, महेश स्थापक, संजीव पचौरी और मुकेश गुप्ता सहित अनेक प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे। सभा के समापन पर सभी सदस्यों ने प्रख्यात शायर और गजलकार डॉ बशीर बद्र को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
