वर्ष 2018 की पुरानी नीति में हुआ संशोधन, नए संगठनात्मक ढांचे को मिली मंजूरी

जबलपुर। मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड ने जबलपुर में 26 मई 2026 को दिवंगत कर्मचारियों के आश्रित परिवारों को संबल देने के लिए वर्ष 2018 की अनुकंपा नियुक्ति नीति में बड़ा संशोधन किया है। कंपनी प्रबंधन द्वारा जारी नए आदेश के तहत संगठनात्मक ढांचे में बदलाव करते हुए अब तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कई महत्वपूर्ण पदों को इस प्रक्रिया में शामिल कर लिया गया है। इस संवेदनशील निर्णय के दायरे में तृतीय श्रेणी के तहत परीक्षण सहायक, कार्यालय सहायक श्रेणी-3 और कनिष्ठ शीघ्रलेखक के पद रखे गए हैं। वहीं चतुर्थ श्रेणी में लाइन परिचालक और सिविल परिचारक के पदों को जोड़ा गया है, ताकि पीड़ित परिवारों को उनकी योग्यता के अनुसार तत्काल रोजगार और आर्थिक सहायता मिल सके।
नीति में संशोधन और पदों का नया वर्गीकरण
बिजली कंपनी ने अपनी पुरानी व्यवस्था में सुधार करते हुए रिक्तियों का दायरा बढ़ा दिया है। इस बदलाव के बाद अब उन परिवारों को नौकरी के ज्यादा अवसर मिलेंगे जिन्होंने अपने कमाने वाले सदस्य को खो दिया है। नई व्यवस्था के तहत योग्यता के आधार पर विभागों में खाली पड़े पदों को भरा जाएगा। इसके तहत तकनीकी और गैर-तकनीकी दोनों ही तरह के क्षेत्रों में काम करने के मौके मिलेंगे। शासन के इस कदम से विभागों में कामकाज की गति भी बढ़ेगी और खाली पड़े पदों को योग्य उम्मीदवार मिल सकेंगे।
तृतीय और चतुर्थ श्रेणी में मिलने वाले रोजगार
कंपनी की नई संगठनात्मक संरचना के अनुसार पदों का विभाजन स्पष्ट कर दिया गया है। कार्यालयीन कार्यों के लिए तृतीय श्रेणी के अंतर्गत दफ्तरों में काम करने वाले सहायकों और शीघ्रलेखकों की भर्ती होगी। इसके साथ ही तकनीकी कार्यों के संपादन के लिए परीक्षण सहायकों को मौका दिया जाएगा। फील्ड और मैदानी स्तर पर काम करने के इच्छुक आश्रितों के लिए चतुर्थ श्रेणी के रास्ते खोले गए हैं, जिसमें लाइन व्यवस्था को संभालने वाले परिचालकों और सिविल कार्यों की देखरेख करने वाले परिचारकों को नियुक्त किया जाएगा।
मानवीय संवेदनाओं के साथ कर्मचारी संगठनों द्वारा स्वागत
प्रबंधन ने इस पूरे बदलाव को पूरी तरह से मानवीय आधार पर लिया गया निर्णय बताया है। आकस्मिक संकट के समय में परिवारों को दफ्तरों के चक्कर काटने से बचाने और उन्हें जल्द से जल्द आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। इस फैसले के सामने आने के बाद ऊर्जा क्षेत्र में काम करने वाले तमाम कर्मचारी संगठनों और श्रमिक नेताओं ने खुशी जाहिर की है। सभी वर्ग के कर्मचारियों ने इसे एक राहत देने वाली और कल्याणकारी पहल बताया है जिससे भविष्य में अनुकंपा के मामलों का निपटारा तेजी से हो सकेगा।
