नगर सत्ता के अंतिम दौर में एमआईसी में एंट्री की होड़, भाजपा पार्षदों ने शुरू की नेताओं की परिक्रमा

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Newzo - News Editor 49 Views
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प्रबंध समिति की बैठक के बाद सियासी पारा चढ़ा, महापौर परिषद और एल्डरमैन नियुक्ति की सुगबुगाहट तेज

जबलपुर। नगर पालिक निगम जबलपुर में शहर सरकार के कार्यकाल के अंतिम दौर में भी सत्ता और संगठन के भीतर राजनीतिक सरगर्मी अचानक तेज हो गई है। लगभग 1.5 सप्ताह पहले संपन्न हुई भाजपा की प्रबंध समिति की बैठक के बाद से ही पार्षदों और स्थानीय नेताओं की सक्रियता चरम पर पहुंच गई है। इस बैठक में गुप्त रूप से महापौर परिषद यानी एमआईसी के बहुप्रतीक्षित विस्तार को लेकर गहन विचार-विमर्श किया गया, जिसके बाद से ही दावेदारों की धड़कनें बढ़ गई हैं। भारतीय जनता पार्टी के कई वरिष्ठ और कनिष्ठ पार्षद खुद को इस महत्वपूर्ण परिषद में शामिल कराने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। इन पार्षदों ने संगठन के शीर्ष नेताओं और अपने राजनीतिक आकाओं के चक्कर लगाने शुरू कर दिए हैं ताकि अंतिम समय में भी उनकी लॉटरी खुल सके। इसके साथ ही नगर निगम में खाली पड़े एल्डरमैन के पदों पर नियुक्ति के लिए भी स्थानीय स्तर पर नेताओं की जबरदस्त खेमाबंदी और सिफारिशों का दौर शुरू हो चुका है, जिससे निगम मुख्यालय से लेकर राजनीतिक गलियारों तक केवल इसी विषय पर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

​प्रबंध समिति की बैठक के बाद बढ़ी हलचल

​स्थानीय स्तर पर भारतीय जनता पार्टी की शीर्ष प्रबंध समिति की बैठक के बाद से ही नगर निगम की राजनीति में अचानक यह उबाल आया है। सूत्रों के मुताबिक इस बंद कमरे की बैठक में शहर विकास के साथ-साथ एमआईसी यानी महापौर परिषद के विस्तार के एजेंडे पर भी मुहर लगाई गई है। बैठक में शामिल रणनीतिकारों का मानना है कि कार्यकाल भले ही अपने अंतिम चरण में हो, लेकिन परिषद का विस्तार किया जाना तय है। इस खबर के बाहर आते ही पार्टी के भीतर कई गुट सक्रिय हो गए हैं। जो पार्षद अब तक शांत बैठे थे, वे भी अब संगठन के बड़े पदाधिकारियों के बंगलों पर हाजिरी लगाने लगे हैं। हालांकि संगठन का कोई भी बड़ा पदाधिकारी या जिम्मेदार नेता अभी खुलकर यह बताने को तैयार नहीं है कि इस फेरबदल की अंतिम तारीख क्या होगी और यह विस्तार कब तक धरातल पर आएगा, लेकिन अंदरूनी तौर पर इसकी रूपरेखा तैयार की जा रही है।

​प्रोफाइल मजबूत करने सीनियर-जूनियर लगा रहे जोर

​महापौर परिषद में जगह पाने के लिए इस समय भाजपा के वरिष्ठ अनुभवी पार्षदों से लेकर पहली बार चुनाव जीतकर आए कनिष्ठ पार्षदों के बीच एक अदृश्य प्रतियोगिता शुरू हो गई है। दावेदारी कर रहे कुछ पार्षदों का दबी जुबान में मानना है कि वर्तमान नगर सरकार का कार्यकाल अब बेहद सीमित समय का ही बचा है। इसके बावजूद यदि उन्हें मात्र कुछ महीनों के लिए भी एमआईसी में शामिल होने का अवसर मिल जाता है, तो उन्हें इस अल्पकाल से कोई आपत्ति नहीं है। पार्षदों का मुख्य उद्देश्य यह है कि लाल बत्ती या एमआईसी सदस्य का तमगा लगने से उनकी राजनीतिक प्रोफाइल हमेशा के लिए मजबूत हो जाएगी, जिसका सीधा लाभ उन्हें भविष्य के विधानसभा या आगामी नगरीय निकाय चुनावों में मिलेगा। यही वजह है कि कम समय होने के बाद भी सिफारिशें लगाने में कोई भी पीछे नहीं रहना चाहता।

​एल्डरमैन की खाली सीटों पर संगठन के चेहरों की नजर

​एक तरफ जहां निर्वाचित पार्षद महापौर परिषद में शामिल होने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ संगठन के वे समर्पित नेता जो चुनाव नहीं लड़ पाए या हार गए थे, वे एल्डरमैन बनने के लिए कड़े प्रयास कर रहे हैं। नगर निगम में एल्डरमैन की नियुक्ति को लेकर भी प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर सुगबुगाहट बेहद तेज हो गई है। नगर सत्ता का समय कम रहने के बावजूद इच्छुक नेता सरकार और संगठन में अपनी पकड़ का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन नेताओं को उम्मीद है कि सरकार जल्द ही एल्डरमैन के नामों की घोषणा कर सकती है, इसलिए वे अपने प्रयासों में कोई भी कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहते हैं।

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