
जबलपुर। जिला लोक अभियोजक कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, किराना व्यवसायी अजय साहू और प्रीति साहू द्वारा किराना दुकान की आड़ में अवैध रूप से मिट्टी का तेल, गैस सिलेंडर की रिफिलिंग और ब्लैक मार्केटिंग का धंधा किया जा रहा था। इसकी लिखित शिकायत जिला खाद्य नियंत्रक अधिकारी, जिला खाद्य शाखा जबलपुर को मिलने पर डिप्टी कलेक्टर जबलपुर द्वारा अजय किराना स्टोर पर आकस्मिक जांच की गई। मौके से 10 घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर जब्त किए गए, जिनमें 3 इंडेन के भरे हुए, 2 भारत गैस कंपनी के और 5 एचपी कंपनी के कुछ भरे व कुछ खाली सिलेंडर शामिल थे। पूछताछ में सामने आया कि यहां तय कीमत से 100 रुपये अतिरिक्त लेकर सिलेंडर ब्लैक में बेचे जाते थे और एक सिलेंडर से दूसरे सिलेंडर में गैस पलटने का काम होता था। विचारण न्यायालय ने आरोपियों को दोषी पाते हुए आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3(7) के तहत 1 वर्ष का सश्रम कारावास व 1000 रुपये अर्थदंड और भारतीय विस्फोटक अधिनियम की धारा 5(9)(ख) के तहत 1 वर्ष का सश्रम कारावास व 500 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ आरोपियों ने अपील दायर की थी, जिसे 29वें अपर सत्र न्यायाधीश श्रीमान अनिल चौहान द्वारा निरस्त कर सजा को स्थिर रखा गया। इस मामले में शासन की ओर से पैरवी अतिरिक्त लोक अभियोजक श्री राजकुमार गुप्ता द्वारा की गई।
प्रशासनिक जांच में हुआ था बड़े रैकेट का खुलासा
खाद्य विभाग और प्रशासनिक टीम को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि क्षेत्र में घरेलू रसोई गैस सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग करने के साथ-साथ उनकी अवैध रीफिलिंग की जा रही है। सूचना की सत्यता जांचने के लिए जब टीम ने अचानक दुकान पर छापा मारा, तो वहां अवैध गतिविधियों का पूरा ढांचा सामने आया। आरोपी बिना किसी सुरक्षा मानकों के बेहद संवेदनशील और ज्वलनशील एलपीजी गैस को एक सिलेंडर से दूसरे सिलेंडर में स्थानांतरित कर रहे थे, जिससे घनी आबादी वाले इस इलाके में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता था। मौके पर मौजूद लोग वैध दस्तावेज या सिलेंडरों के भंडारण का लाइसेंस पेश नहीं कर सके, जिसके बाद पूरी खेप को जब्त कर दुकान संचालक के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।
अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए खारिज की अपील
अधीनस्थ अदालत द्वारा दी गई सजा के खिलाफ आरोपियों ने ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाया था। अपील की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मजबूती से सारे साक्ष्य और गवाहों के बयान अदालत के सामने रखे। कोर्ट ने माना कि घरेलू गैस की कालाबाजारी और अवैध रिफिलिंग न केवल आर्थिक अपराध है, बल्कि आम जनता की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ भी है। अदालत ने दोनों आरोपियों की दलीलों को अमान्य करते हुए साफ किया कि ऐसे गंभीर मामलों में नरमी नहीं बरती जा सकती। इस फैसले के बाद दोनों दोषियों को जेल भेजने की कार्रवाई सुनिश्चित की गई है।
