26 मई से काम शुरू कर सकता है आयोग,जस्टिस द्विवेदी लेंगे व्यवस्थाओं का जायजा
जबलपुर। बरगी बांध क्रूज हादसे की जांच के लिए गठित एकल जांच आयोग आगामी 26 मई से कलेक्ट्रेट के कमरा नंबर 43 में अपना औपचारिक कामकाज शुरू करने जा रहा है। मध्य प्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा हादसे के 10वें दिन यानी 10 मई को इस उच्च स्तरीय न्यायिक आयोग के गठन की अधिसूचना जारी की गई थी। हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी की अध्यक्षता में बने इस आयोग को 3 माह के भीतर अपनी पूरी जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी है। शुरुआत में कार्यालय, आवश्यक संसाधन और स्टाफ की व्यवस्था न होने के कारण काम शुरू होने में कुछ अड़चनें आ रही थीं, लेकिन अब प्रशासनिक स्तर पर तेजी दिखाते हुए कमरा आवंटित कर दिया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने आयोग की सेवा-शर्तों से जुड़ी फाइल को भी आगे बढ़ा दिया है, जिससे इस महीने के अंत तक जांच प्रक्रिया में तेजी आने की पूरी संभावना है। इस विशेष जांच का मुख्य उद्देश्य बांध में हुए इस दर्दनाक हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाना, लापरवाही के जिम्मेदार लोगों और विभागों की जवाबदेही तय करना तथा भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए पुख्ता सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करना है।
कार्यालय आवंटन के साथ जांच प्रक्रिया में आई तेजी
क्रूज हादसे की जांच को समय पर पूरा करने के उद्देश्य से प्रशासनिक अमले ने कलेक्ट्रेट भवन में आवश्यक जगह उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया है। आयोग के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी सबसे पहले आवंटित कलेक्ट्रेट के कमरा नंबर 43 और वहां मिलने वाली सभी सरकारी सुविधाओं का बारीकी से निरीक्षण करेंगे। इसके बाद 26 मई से इस दफ्तर में आयोग का काम पूरी गति से संचालित होने लगेगा। प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस संबंध में आयोग के अध्यक्ष से सीधा संपर्क कर उन्हें पूरी व्यवस्था की जानकारी दे दी है। इसके साथ ही सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा आयोग के सुचारू संचालन के लिए जरूरी सेवा-शर्तों और नियमों को अंतिम रूप देने की विभागीय प्रक्रिया भी तेजी से पूरी की जा रही है, ताकि पूरी जांच के दौरान किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक बाधा सामने न आए।
हादसे की जांच के लिए तय किए गए प्रमुख बिंदु
राज्य सरकार द्वारा गठित इस एकल सदस्यीय जांच आयोग के सामने जांच के लिए कई महत्वपूर्ण बिंदु तय किए गए हैं। आयोग सबसे पहले इस क्रूज दुर्घटना के मूल कारणों की गहराई से पड़ताल करेगा और हादसे के लिए उत्तरदायी तत्वों का निर्धारण करेगा। इसके साथ ही दुर्घटना के समय किए गए बचाव कार्यों की पर्याप्तता और पीड़ित लोगों को दी गई राहत गतिविधियों की भी पूरी समीक्षा की जाएगी। राज्य भर में संचालित होने वाली सभी प्रकार की नौकाओं, क्रूज और अन्य जल क्रीड़ा गतिविधियों का नए सिरे से सुरक्षा ऑडिट किया जाएगा। इस ऑडिट का मुख्य आधार इनलैंड वेसल्स एक्ट 2021 और एनडीएमए बोट सेफ्टी गाइडलाइंस 2017 के कड़े प्रावधान होंगे, जिनके अनुसार सभी प्रकार के जलयानों के अनिवार्य प्रमाणीकरण की मजबूत व्यवस्था तैयार की जाएगी।
जल परिवहन को सुरक्षित बनाने के लिए नए नियमों की तैयारी
आयोग का एक बड़ा काम भविष्य के लिए सुरक्षा मानक तय करना भी है। इसके तहत पूरे राज्य में क्रूज और नौकाओं के सुरक्षित संचालन व उनके नियमित रखरखाव के लिए एक समान मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी का खाका तैयार किया जाएगा। इसके अतिरिक्त ऐसे सभी पर्यटन स्थलों और जलाशयों पर जहां आम नागरिक जल परिवहन, नौका विहार या जल क्रीड़ा गतिविधियों का आनंद लेते हैं, वहां एक त्वरित प्रतिक्रिया दल यानी क्विक रिस्पॉन्स टीम के गठन की अनिवार्य व्यवस्था की जाएगी। इन सभी ठोस कदमों और कड़े नियमों को लागू करने की रूपरेखा इस रिपोर्ट के आधार पर तैयार की जाएगी, जिससे बांधों और नदियों में पर्यटन के दौरान आम नागरिकों की सुरक्षा को पूरी तरह से पुख्ता किया जा सके।
