
डिंडौरी। जिले में अमृत 2.0 योजना के तहत 68 लाख रुपए के पुराने जलाशय सौंदर्यीकरण प्रोजेक्ट में बड़ा घोटाला सामने आया है जिसमें 42 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया के निर्देश पर बनी तीन सदस्यीय जांच टीम ने खुलासा किया है कि वार्ड 12 और 13 के पास सीधे तालाब के भीतर सीवर लाइन और मेनहोल बना दिए गए हैं। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की खराबी से दूषित पानी जलाशय में समा रहा है। इस अनियमितता पर आरटीआई कार्यकर्ता सतीश शिवात्री ने सवाल उठाए हैं। जांच रिपोर्ट में तत्कालीन सीएमओ अमित तिवारी, इंजीनियर शिवराज बघेल, तहसीलदार आरपी मार्को, राजस्व निरीक्षक हेमंत उइके और पटवारी बलिराम भवेदी के अलावा एमपीयूडीसी और जल संसाधन विभाग के जिम्मेदारों पर विभागीय जांच, निलंबन तथा ईओडब्ल्यू या लोकायुक्त से एफआईआर की सिफारिश की गई है।
तालाब के अंदर सीवर लाइन बिछाने का खेल
इस महत्वाकांक्षी योजना का क्रियान्वयन वर्ष 2024-25 के दौरान शुरू हुआ था। शासन स्तर से मिले भारी भरकम बजट का किस तरह दुरुपयोग किया गया, इसकी पोल जांच रिपोर्ट ने खोल दी है। बिना किसी वैध एनओसी और तकनीकी स्वीकृतियों के ही मनमाने तरीके से निर्माण कार्य शुरू कर दिए गए। स्थिति यह है कि विकास कार्यों के नाम पर जल स्रोत को सुरक्षित रखने के बजाय उसे पूरी तरह बर्बाद कर दिया गया। वार्ड 12 और 13 के निवासियों के सामने अब गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं खड़ी हो गई हैं क्योंकि गंदा पानी सीधे पानी के मुख्य स्रोत में मिल रहा है।
पाँच जिम्मेदार अधिकारियों पर एफआईआर की कड़ी सिफारिश
प्रशासनिक अमले की मिलीभगत के बिना इस स्तर का भ्रष्टाचार होना संभव नहीं था। जांच दल ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में साफ कर दिया है कि तत्कालीन सीएमओ अमित तिवारी, इंजीनियर शिवराज बघेल, तहसीलदार आरपी मार्को, राजस्व निरीक्षक हेमंत उइके और पटवारी बलिराम भवेदी ने अपने कर्तव्यों का पालन करने में भारी लापरवाही बरती। अतिक्रमण रोकने में पूरी तरह विफलता और घटिया निर्माण सामग्री के प्रयोग ने इस पूरे प्रोजेक्ट को एक बड़ा घोटाला बना दिया है। इन सभी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ ही थर्ड पार्टी ऑडिट कराने की संस्तुति भी की गई है।
अंतिम जांच रिपोर्ट के बाद होगी सख्त कार्रवाई
इस पूरे मामले को लेकर जब स्थानीय स्तर पर आवाज उठाई गई तब प्रशासन हरकत में आया। फिलहाल जांच टीम द्वारा केवल अंतरिम रिपोर्ट सौंपी गई है जिसके आधार पर प्रारंभिक निष्कर्ष सामने आए हैं। कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया का स्पष्ट कहना है कि जैसे ही इस पूरे प्रकरण की अंतिम रिपोर्ट प्रशासनिक टेबल पर पहुंचेगी, वैसे ही सभी दोषियों के खिलाफ कठोर वैधानिक कदम उठाते हुए विस्तृत प्रतिवेदन उच्च स्तर पर शासन को भेज दिया जाएगा ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह की लापरवाही करने की हिम्मत न जुटा सके।
