

एमपी ट्रांसको के अभियंताओं ने दिखाई कमाल की तकनीकी दक्षता, कटनी में किया बड़ा कारनामा
जबलपुर। मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी के जबलपुर टेस्टिंग सर्किल के अभियंताओं ने कटनी के 400 केवी सबस्टेशन में एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य को अंजाम दिया है। अतिरिक्त मुख्य अभियंता श्री आर.सी. शर्मा के दिशा-निर्देशन और पहल पर तकनीकी टीम ने बिरसिंहपुर नंबर-2 फीडर में लगे 20 वर्ष पुराने एबीबी निर्मित सर्किट ब्रेकर की इन-हाउस ओवरहॉलिंग सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। लगातार एक सप्ताह तक चले इस सघन मेंटेनेंस कार्य की वजह से कंपनी को लगभग 50 लाख रुपये की सीधी आर्थिक बचत हुई है। इस पूरे अभियान में ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस संभाग दमोह और कटनी के तकनीकी स्टाफ का विशेष योगदान रहा। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने अभियंताओं और कर्मचारियों की इस विशेषज्ञता, आत्मनिर्भर कार्य संस्कृति और लागत नियंत्रण के प्रयास की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए पूरी टीम को बधाई दी है।
बिना नए स्पेयर पार्ट्स के पुरानी तकनीक को किया दुरुस्त
यह सर्किट ब्रेकर पहली पीढ़ी यानी फर्स्ट जेनरेशन की तकनीक पर आधारित है। लगभग 20 साल पुराना होने के कारण बाजार में इसके जरूरी स्पेयर पार्ट्स आसानी से उपलब्ध नहीं थे। इसके बावजूद कटनी डिवीजन के अभियंताओं ने अपनी तकनीकी सूझबूझ और पुराने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए इस मशीन का बारीकी से निरीक्षण और परीक्षण किया। टीम ने उपलब्ध संसाधनों के जरिए ही जरूरी मरम्मत कार्य किया और खराब हो चुके हिस्सों को बदलकर इसे दोबारा पूरी तरह कामकाजी और सुरक्षित स्थिति में ला खड़ा किया।
350 मेगावाट बिजली सप्लाई वाले रूट को मिली मजबूती
जिस सर्किट ब्रेकर को सुधारा गया है, वह बिरसिंहपुर ताप विद्युत गृह से जुड़ने वाले एक अत्यंत महत्वपूर्ण रूट पर लगा हुआ है। इस खास फीडर के जरिए रोजाना लगभग 350 मेगावाट बिजली का ट्रांसमिशन होता है, जो राज्य की मुख्य विद्युत आपूर्ति व्यवस्था के लिए लाइफलाइन माना जाता है। इस सफल मेंटेनेंस के बाद अब इस महत्वपूर्ण रूट की विश्वसनीयता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है, जिससे भविष्य में बिजली कटने या ग्रिड के फेल होने का खतरा पूरी तरह टाल दिया गया है।
आत्मनिर्भरता और विभागीय बचत का बना नया रिकॉर्ड
इस पूरे कार्य को बाहरी एजेंसी की मदद लिए बिना पूरी तरह विभागीय स्तर पर ही अंजाम दिया गया है। आमतौर पर इतनी पुरानी और जटिल मशीनों को सुधारने के लिए विदेशी या निजी कंपनियों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे बड़ा खर्च होता है। सरकारी अमले द्वारा खुद अपनी मेहनत से इसे ठीक करने से न केवल सरकारी खजाने के 50 लाख रुपये बचे हैं, बल्कि इससे विभाग के तकनीकी कर्मचारियों का आत्मविश्वास भी बढ़ा है, जो आने वाले समय में अन्य सबस्टेशनों के लिए मिसाल बनेगा।
