
जबलपुर। देश के सत्ता गलियारों में एक अप्रत्याशित फैसले की सुगबुगाहट के बीच मध्य प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह को भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय आलाकमान ने अचानक नई दिल्ली तलब कर लिया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर गठित हो रही स्पेशल इंसेंटिव रिवीजन समिति में मध्य प्रदेश से प्रस्तावित 2 प्रमुख चेहरों में से राकेश सिंह को सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपने की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। शीर्ष नेतृत्व के इस अचानक आए फरमान के बाद शनिवार 24 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे वे जबलपुर से पहले भोपाल पहुंचेंगे और फिर वहां से विशेष विमान द्वारा सीधे देश की राजधानी के लिए उड़ान भरेंगे। प्रशासनिक अमले को इस त्वरित रवानगी की भनक लगते ही पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया है, क्योंकि संगठन में उनके इस बड़े प्रमोशन को महाकोशल अंचल के साथ-साथ समूचे राज्य के राजनीतिक प्रभाव में अभूतपूर्व उछाल के तौर पर आंका जा रहा है।
सरकारी बैठकों के साथ जनसुनवाई पर एकाएक ब्रेक
शीर्ष नेतृत्व के एकाएक निर्देश के चलते जबलपुर में प्रस्तावित अगले 2 दिनों के सभी सार्वजनिक और प्रशासनिक कार्यक्रम तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिए गए हैं। विकास कार्यों के भूमिपूजन, शिलान्यास तथा जनसमस्या निवारण से जुड़े महत्वपूर्ण सरकारी आयोजनों को आगे खिसकाने के आदेश जारी हो चुके हैं। इस अप्रत्याशित यात्रा कार्यक्रम से मैदानी स्तर पर सक्रिय सरकारी मशीनरी और पार्टी कार्यकर्ताओं की महीनों पुरानी तैयारियों पर एक झटके में पूरी तरह विराम लग गया है।
शरद पूर्णिमा के पावन मंच पहली बार अनुपस्थिति
विश्व प्रसिद्ध भेड़ाघाट के संगमरमरी वादियों में शरद पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित होने वाले ऐतिहासिक नर्मदा महोत्सव में यह पहला मौका होगा जब कैबिनेट मंत्री उपस्थित नहीं रहेंगे। दशकों पुरानी इस सांस्कृतिक परंपरा के टूटने से स्थानीय नागरिक और कला जगत के लोग स्तब्ध रह गए हैं। इस भव्य जल समारोह से ऐन वक्त पर दूरी बनने के पीछे आलाकमान की उस अति गोपनीय बैठक को वजह माना जा रहा है, जिसकी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए उनका दिल्ली पहुंचना अनिवार्य कर दिया गया है।
राजधानी के बंद कमरों से उभरेंगे नए समीकरण
भोपाल के रास्ते दिल्ली के केंद्रीय कार्यालय तक होने वाले इस गोपनीय सफर ने मध्य प्रदेश की पूरी सियासत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विशेष समिति में कैबिनेट मंत्री को मिलने जा रहा यह राष्ट्रीय दायित्व आगामी समय में प्रांतीय सत्ता और संगठन के आंतरिक शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल कर रख देगा। संगठन के वरिष्ठ रणनीतिकार अब टकटकी लगाए बैठे हैं कि राजधानी में होने वाले इस महामंथन के बाद प्रांतीय राजनीति का नया स्वरूप क्या होगा।
