
निगमायुक्त के ट्रांसफर को ‘राम हरण’ बताने पर गरमाई सियासत, कांग्रेस ने खोला मोर्चा
जबलपुर। मध्य प्रदेश शासन द्वारा जबलपुर नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार का भोपाल तबादला किए जाने के बाद पाटन से वरिष्ठ भाजपा विधायक अजय विश्नोई के एक बयान ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। विश्नोई ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए लिख दिया कि दशहरे के दिन संस्कारधानी से ‘राम’ का हरण हो गया। एक प्रशासनिक अधिकारी के नाम को सीधे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम से जोड़ने पर जैसे ही विवाद भड़का, विपक्षी दल पूरी तरह हमलावर हो गए। हालांकि फजीहत बढ़ती देख विधायक ने अपनी पोस्ट हटा ली, लेकिन तब तक युवक कांग्रेस नेता दृगपाल सिंह लोदी ने इस तुलना पर कड़ा ऐतराज जताते हुए सत्ता पक्ष पर चौतरफा हमला बोल दिया; हालांकि इसी जल्दबाजी में वे खुद विश्नोई को कांग्रेस का विधायक बता बैठे।
पोस्ट डिलीट होने के बाद भी हमलावर रुख, बयानों की बौछार जारी
अजय विश्नोई के इस विवादित बयान के बाद से राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। अपने बयानों से अक्सर चर्चा में रहने वाले पूर्व मंत्री की इस टिप्पणी ने जनता और राजनीतिक विश्लेषकों दोनों को चौंका दिया। सोशल मीडिया पर लोगों ने खुलकर नाराजगी जताई कि नौकरशाही के तबादले जैसे सामान्य प्रशासनिक फैसले में धार्मिक आराध्य का नाम घसीटना मर्यादा के खिलाफ है। हालांकि विरोध की तपिश भांपते हुए विधायक ने पोस्ट तुरंत हटा दी, लेकिन स्क्रीनशॉट के जरिए विपक्षी खेमा अब भी सरकार और भाजपा संगठन पर लगातार हमले कर रहा है।
हमले की जल्दबाजी में विपक्षी खेमे से भी हो गई भारी चूक
विश्नोई के बयान को लपकते हुए युवक कांग्रेस ने सत्ता पक्ष की घेराबंदी करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। युवा कांग्रेस नेता ने तीखा वार करते हुए कहा कि एक सरकारी अफसर को भगवान का दर्जा देना और तबादले को ‘राम हरण’ कहना घोर अनुचित और आस्था का अपमान है। लेकिन विश्नोई पर निशाना साधने के अति-उत्साह में विपक्षी नेता की जुबान ऐसी फिसली कि उन्होंने भाजपा के दिग्गज नेता को अपनी ही पार्टी (कांग्रेस) का विधायक करार दे दिया। अब जबलपुर के सियासी हलकों में जहां विश्नोई के ‘राम’ वाले बयान पर घमासान छिड़ा है, वहीं विपक्ष के इस ‘सेल्फ गोल’ की भी खूब खिल्ली उड़ाई जा रही है।
