
कटनी के बहुचर्चित कांड में जबलपुर एएसपी ने संभाला मोर्चा,दस्तावेज खंगाले
जबलपुर। कटनी में कन्हवारा की विवादित जमीन के जरिए हत्या के आरोपी को राहत देने के सौदे में फंसी निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया पर कानूनी शिकंजा कस गया है। आइजी के निर्देश पर जबलपुर की एएसपी अंजना तिवारी ने कटनी पहुंचकर सीएसपी दफ्तर के दस्तावेज जब्त किए और मौका मुआयना किया। इस प्रकरण में जमीन नामांतरण को लेकर राजस्व विभाग भी जांच के घेरे में आ गया है, जिस पर तहसीलदार अवंतिका तिवारी ने नियमानुसार प्रक्रिया पूरी करने का दावा किया। जांच टीम अब तत्कालीन थाना प्रभारी राजेंद्र मिश्रा, मारूफ अहमद और क्षितिजराज बारापात्रे से जुड़ी शाइन पार्टनर कंस्ट्रक्शन कंपनी की भूमिका से जुड़े सभी साक्ष्यों को बारीकी से खंगाल रही है। यह पूरा मामला पुलिस और राजस्व के गठजोड़ की ओर इशारा करता है।
कन्हवारा की विवादित जमीन से खुलेंगे राज
एएसपी ने शनिवार को कन्हवारा पहुंचकर उस भूमि का प्रत्यक्ष भौतिक सत्यापन किया, जहां से इस पूरे षड्यंत्र की शुरुआत मानी जा रही है। जांच टीम ने सीएसपी कार्यालय में रखे केस से संबंधित सभी पुराने अभिलेखों और पत्रावलियों को अपने अधिकार में लेकर तकनीकी परीक्षण शुरू कर दिया है। हत्या के आरोपी पक्ष का दावा है कि उन्होंने नामांतरण प्रक्रिया रुकवाने के लिए सक्षम कार्यालय में विधिवत लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी, लेकिन उनकी बात सुने बिना ही जमीन का दाखिल-खारिज कर दिया गया। इसके विपरीत राजस्व अमले ने अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि सार्वजनिक इश्तहार के अलावा शासकीय ऑनलाइन पोर्टल पर निर्धारित सूचना का प्रकाशन कराया गया था। नियत समयावधि में कोई वैधानिक विरोध या दावा प्रस्तुत नहीं किए जाने के उपरांत ही नामांतरण को अंतिम मंजूरी दी गई थी।
हत्याकांड में लेनदेन और संदेही कंपनियों की पड़ताल
विशेष जांच दल अब इस कथित सौदेबाजी के पीछे सक्रिय बिचौलियों और पर्दे के पीछे काम करने वाले सहयोगियों के नेटवर्क को बेनकाब करने में जुटा है। जांच का दायरा संबंधित निर्माण फर्म के बैंक खातों, परिसंपत्तियों और आपसी अनुबंधों के विश्लेषण तक विस्तृत कर दिया गया है। मामले में शामिल अन्य संदिग्धों की आवाजाही और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की भी तकनीकी जांच की जा रही है। आरोपियों ने पूर्व में स्थानीय थाने के तत्कालीन प्रभारी पर भी पक्षपातपूर्ण आचरण के गंभीर आरोप लगाए थे। यह पूरा हत्याकांड 1 अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के विशेष प्रावधानों से आच्छादित था। इसी कानूनी बाध्यता के तहत घटना की प्राथमिकी दर्ज होने के ठीक अगले 1 दिन के भीतर जिले के पुलिस अधीक्षक ने विवेचना डायरी सीएसपी को स्थानांतरित की थी। अब जांच अधिकारी सभी पक्षों के बयानों और प्राप्त साक्ष्यों का मिलान कर रहे हैं ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
