बिजली कर्मचारियों पर धारदार हथियार से हमला, आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग

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Newzo - News Editor 94 Views
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​जबलपुर। शहर के पंजाब बैंक कॉलोनी दमोह नाका स्थित नर्मदा परिसर में गत दिवस स्मार्ट मीटर लगाने गए पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों पर कुछ लोगों ने धारदार हथियार से हमला कर दिया। इस घटना में जेई गौतम मुखर्जी और कर्मचारी कमलेश सोनी घायल हो गए। मध्य प्रदेश विद्युत मंडल तकनीकी कर्मचारी संघ के प्रांतीय महासचिव हरेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि इस दौरान वहां मौजूद अन्य कर्मचारी गुलाब सिंह राजपूत, जितेंद्र चौकसे और व्यंकटेश भी दल में शामिल थे। हमलावरों की कुल संख्या 5 से 6 थी जिन्होंने अचानक इस खतरनाक वारदात को अंजाम दिया। इस पूरे गंभीर मामले की प्राथमिकी तुरंत कोतवाली थाने में दर्ज करा दी गई है और पुलिस उनकी तलाश तेजी से कर रही है।

​मीटर लगाने गए बिजली कर्मियों पर हुआ हमला

​घटना के बाद से बिजली विभाग के कर्मचारियों में भारी रोष और असंतोष का माहौल बना हुआ है। कर्मचारियों का कहना है कि वे रोजाना अपनी जान जोखिम में डालकर शहर में विद्युत व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने का काम करते हैं, लेकिन यदि उनके साथ इस तरह की मारपीट की घटनाएं होने लगेंगी तो वे कैसे काम कर पाएंगे। मध्य प्रदेश विद्युत मंडल तकनीकी कर्मचारी संघ के नेताओं ने इस कायराना हमले की पुरजोर शब्दों में निंदा की है। मोहन दुबे, राजकुमार सैनी, अजय कश्यप, विनोद दास, लखन सिंह राजपूत, शशि उपाध्याय, दशरथ शर्मा, किशोर, इंद्रपाल सिंह और संदीप दीपांकर सहित संघ के अन्य सभी सदस्यों ने प्रशासन के सामने अपनी स्पष्ट और दो टूक मांग रखी है। उन्होंने कहा कि सरकारी कार्य में बाधा डालने वाले और बलवा करने वाले इन तमाम उपद्रवियों को पुलिस जितनी जल्दी हो सके गिरफ्तार करे।

​कर्मचारी संघ ने पुलिस प्रशासन से की मांग

​संघ के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस प्रशासन ने इस मामले में ढिलाई बरती और आरोपियों को जल्द सलाखों के पीछे नहीं पहुंचाया, तो पूरे प्रदेश के बिजली कर्मचारी बड़े आंदोलन के रास्ते पर उतरने के लिए मजबूर हो जाएंगे। इस बीच पुलिस अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि कोतवाली थाने में दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर आरोपियों की धरपकड़ के लिए टीमें गठित कर दी गई हैं। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि हमलावरों की सही पहचान करके उन्हें कानून के शिकंजे में कसा जा सके। इस घटना ने एक बार फिर फील्ड में काम करने वाले तकनीकी कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिस पर विभाग और शासन स्तर पर भी मंथन शुरू हो गया है।

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