भाजपा ग्रामीण अध्यक्ष की कुर्सी बनी ‘शोपीस’, सीनियर विधायक की वक्रदृष्टि बनी मुसीबत

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Newzo - News Editor 45 Views
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सियासी चक्रव्यूह में उलझे जबलपुर ग्रामीण भाजपा अध्यक्ष, रसूखदार विधायक के वीटो से संगठन में पूछ परख घाटी

जबलपुर। जबलपुर जिला भाजपा के ग्रामीण अध्यक्ष राजकुमार पटेल इन दिनों स्थानीय राजनीति के सबसे बड़े सियासी चक्रव्यूह में फंसकर पूरी तरह से हाशिए पर आ गए हैं। पिछले 6 महीने के लंबे अंतराल में सार्वजनिक मंचों और पार्टी के अहम कार्यक्रमों से उनकी रहस्यमयी दूरी ने अब एक बड़े विवाद का रूप ले लिया है। गिने-चुने कार्यक्रमों को छोड़ दें तो जिला अध्यक्ष की यह गैर-मौजूदगी पूरी तरह से सांगठनिक संकट की ओर इशारा कर रही है, जिसे लेकर पार्टी के भीतर सुगबुगाहट चरम पर है। अंदरूनी सूत्रों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक जबलपुर जिले के ही एक बेहद रसूखदार और सीनियर भाजपा विधायक ने संगठन में राजकुमार पटेल की घेराबंदी कर दी है। वह किसी भी कीमत पर पटेल को आगे बढ़ता हुआ नहीं देखना चाहते, जिसके चलते जिला अध्यक्ष की पूछ-परख पूरी तरह से समाप्त कर दी गई है। उनके दौरों और कार्यक्रमों की रूपरेखा कब गायब हो जाती है, इसकी भनक तक कार्यकर्ताओं को नहीं लगती। इस घोर उपेक्षा से आहत अध्यक्ष ने बेहद दबी जुबान में अपनी लाचारी बड़े नेताओं के सामने रोई जरूर है, लेकिन विधायक के खौफ और राजनीतिक भविष्य के डर से वह खुलकर बगावत नहीं कर पा रहे हैं। नतीजा यह है कि कमान हाथ में होते हुए भी वह बेबस हैं, जिससे ग्रामीण भाजपा के कार्यकर्ताओं और मैदानी पदाधिकारियों में भारी आक्रोश भड़क उठा है क्योंकि उन्हें दिशा दिखाने वाला कोई नहीं बचा है।

​कद्दावर विधायक की कूटनीति के आगे लाचार हुआ जिला संगठन

​जबलपुर जिले की सियासत में एक सीनियर भाजपा विधायक का दखल इस कदर बढ़ गया है कि उन्होंने ग्रामीण अध्यक्ष राजकुमार पटेल के पर कतरने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। विधायक की सोची-समझी रणनीति के तहत संगठन के भीतर ऐसा माहौल तैयार कर दिया गया है जिससे पटेल पूरी तरह अलग-थलग पड़ जाएं। आलम यह है कि जिला अध्यक्ष के पद पर होने के बावजूद सांगठनिक फैसलों और महत्वपूर्ण बैठकों से उन्हें दूर रखा जा रहा है। विधायक के इस भारी राजनीतिक दबाव के आगे संगठन के अन्य बड़े नेताओं ने भी चुप्पी साध ली है, जिससे ग्रामीण भाजपा में गुटबाजी की जड़ें और गहरी हो गई हैं।

​मुखिया की बेरुखी से नाराज कार्यकर्ताओं में बगावत के सुर

​संगठन के शीर्ष स्तर पर चल रही इस खींचतान का सबसे बुरा असर जबलपुर ग्रामीण के मैदानी कार्यकर्ताओं और ऊर्जावान पदाधिकारियों पर पड़ रहा है। पिछले 6 महीने से पार्टी की सक्रियता पूरी तरह ठप होने से कार्यकर्ताओं का धैर्य अब जवाब देने लगा है। पदाधिकारियों का साफ कहना है कि जब जिला अध्यक्ष ही मैदान से गायब रहेंगे, तो वे जनता के बीच किस मुंह से जाएंगे। नेतृत्व की इस अनदेखी और शून्यता ने ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टी के आधार को हिलाकर रख दिया है, जिससे नाराज कार्यकर्ताओं के बीच अब सामूहिक इस्तीफे और अंदरूनी बगावत की जमीन तैयार होने लगी है।

​कुर्सी बचाने की मजबूरी और घुटती हुई राजनीतिक आवाज

​इस पूरे सियासी ड्रामे में राजकुमार पटेल की स्थिति बेहद दयनीय और लाचार दिखाई दे रही है। एक तरफ सीनियर विधायक का चक्रव्यूह है और दूसरी तरफ अपनी कुर्सी बचाने की सबसे बड़ी मजबूरी। यही वजह है कि इतनी बड़ी उपेक्षा और अपमान झेलने के बाद भी पटेल खुलकर सामने आने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। वरिष्ठ नेताओं के सामने बंद कमरों में बहुत ही कमजोर तरीके से अपनी बात रखने वाले अध्यक्ष अब पूरी तरह खामोश हो चुके हैं। अध्यक्ष की यह घुटती हुई आवाज और बड़े नेताओं की यह रहस्यमयी उदासीनता आने वाले समय में जबलपुर ग्रामीण भाजपा के लिए एक बड़े आत्मघाती संकट का संकेत दे रही है।

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