
जबलपुर। छतरपुर जिले के बागेश्वर धाम क्षेत्र में 16 वर्ष की किशोरी से दुष्कर्म और उसे गर्भवती करने के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नया मोड़ ला दिया है। एकलपीठ के जस्टिस अजय कुमार निरंकारी ने सुनवाई करते हुए छतरपुर पुलिस अधीक्षक को तत्काल विशेष जांच दल यानी एसआईटी गठित करने का कड़ा निर्देश जारी किया है। जेल में बंद आरोपी राजू जाटव की जमानत याचिका परविचार करते हुए अदालत ने यह पाया कि गर्भपात के बाद कराए गए भ्रूण परीक्षण में वह जैविक पिता साबित नहीं हुआ। इसी वैज्ञानिक साक्ष्य के मद्देनजर अदालत ने असली अपराधी की पहचान सुनिश्चित करने और पूरे मामले की तह तक पहुंचने के लिए पुलिस को 2 माह की समय-सीमा तय कर दी है।
डीएनए रिपोर्ट से आरोपी का दावा हुआ मजबूत
जेल में निरुद्ध राजू जाटव ने जमानत पाने के लिए हाईकोर्ट की शरण ली थी। दर्ज मामले के अनुसार, पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में आरोप लगाया था कि आरोपी ने उसके साथ जबरन दुराचार किया, जिससे वह गर्भवती हो गई थी। कानूनी प्रक्रिया के तहत गर्भपात कराया गया और साक्ष्य सुरक्षित रखने के लिए भ्रूण का डीएनए परीक्षण संपन्न हुआ। जब जांच रिपोर्ट अदालत के सामने पेश हुई, तो उसमें स्पष्ट तौर पर प्रमाणित हुआ कि राजू जाटव उस अजन्मे बच्चे का जैविक पिता नहीं है। इस वैज्ञानिक निष्कर्ष ने अभियोजन के मूल आधार पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया।
असली मुजरिम पकड़ने हेतु पुलिस को मिली मोहलत
अदालती कार्यवाही के दौरान यह तथ्य भी रेखांकित हुआ कि किशोरी को आरोपी की पत्नी द्वारा बताए गए स्थान से बरामद किया गया था। हालांकि बाद में पीड़िता अपने दिए बयानों से मुकर गई। बेंच ने आदेश में स्पष्ट दर्ज किया कि जब बंद कैदी जैविक पिता नहीं है, तो यह पता लगाना बेहद जरूरी है कि नाबालिग के साथ अनाचार किसने किया और भ्रूण का असली पिता कौन है। जस्टिस अजय कुमार निरंकारी ने छतरपुर एसपी को 2 माह में विस्तृत पड़ताल पूरी कर रिपोर्ट सौंपने का आदेश देते हुए फिलहाल जमानत अर्जी खारिज कर दी।
