हार और करीबी जीत वाली सीटों पर भाजपा का नया एक्शन प्लान

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Newzo - News Editor 28 Views
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जबलपुर। मध्य प्रदेश भाजपा ने चुनावी मौसम की निर्भरता त्यागकर कमजोर क्षेत्रों में पकड़ पुख्ता करने की नई कार्ययोजना बनाई है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में पराजित 66 सीटों तथा 5000 से कम मतों के अंतर वाली विजयी सीटों की विशेष निगरानी की जाएगी। नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देव विदेश प्रवास से लौटकर नवरात्रि में मध्य प्रदेश का दौरा करेंगे। वे भोपाल में औपचारिक बैठकें करने की जगह सीधे मैदानी इलाकों में जाकर कार्यकर्ताओं से रूबरू होंगे। इस कवायद में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर के साथ उच्च स्तरीय विचार-विमर्श तय किया गया है। पूरी रणनीति स्थानीय समस्याओं के आधार पर अलग-अलग तैयार की जा रही है।

​बिप्लब देव सीधे मैदानी कार्यकर्ताओं से मिलेंगे

​प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देव का आगामी प्रवास संगठनात्मक ढांचे को धरातल पर परखने के उद्देश्य से तय हुआ है। वे प्रदेश कार्यालय तक सीमित रहने के बजाय कमजोर इलाकों का दौरा करेंगे। हालिया बैठकों के दौरान उन सीटों का सूक्ष्म विश्लेषण किया गया है जहाँ पार्टी को हार झेलनी पड़ी थी अथवा जीत का अंतर बेहद कम रहा था। अब पारंपरिक चुनावी समीकरणों के स्थान पर बूथ स्तर की सक्रियता, स्थानीय नेतृत्व की क्षमता और आम जनता से जुड़ाव की स्थिति का मूल्यांकन होगा। राज्य नेतृत्व का मानना है कि सभी कमजोर क्षेत्रों पर एक समान फॉर्मूला थोपने के बजाय क्षेत्रीय विषमताओं को समझकर अलग कार्ययोजना लागू की जाए।

​गुटबाजी करने वाले स्थानीय नेताओं की छंटनी

​पार्टी के भीतर स्थानीय स्तर पर चल रही आपसी खींचतान से निपटने के लिए अलग रिपोर्ट तैयार की जा रही है। प्रदेश प्रभारी ने ऐसे नेताओं की क्षेत्रवार सूची तलब की है, जिनके निजी वर्चस्व के टकराव से संगठन को क्षति पहुँच रही है। विवादित नेताओं से अलग-अलग बातचीत करके मतभेद दूर करने का प्रयास किया जाएगा। यदि आपसी समन्वय स्थापित नहीं हो सका तो संगठन स्तर पर कठोर प्रशासनिक निर्णय लेकर जिम्मेदारियों में फेरबदल किया जाएगा। इसका मुख्य लक्ष्य गुटबाजी खत्म कर जमीनी कार्यकर्ताओं तक नेतृत्व का स्पष्ट व सकारात्मक संदेश पहुँचाना है।

दोहरी जिम्मेदारी संभाल रहे चेहरे बदलेंगे

​वर्तमान कार्यकारिणी में शामिल ऐसे पदाधिकारियों की भूमिका की समीक्षा प्रस्तावित है, जो जनप्रतिनिधि निर्वाचित हो चुके हैं। जनप्रतिनिधि बनने के कारण जो नेता संगठन को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं, उनके स्थान पर ऊर्जावान युवा कार्यकर्ताओं को दायित्व सौंपने का विचार चल रहा है। इस फेरबदल को लेकर प्रभारी बिप्लब कुमार देव की मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और संगठन महामंत्री चंद्रशेखर के साथ विस्तृत बैठक होगी। जनप्रतिनिधियों और संगठन के बीच स्पष्ट कार्यविभाजन तय करके सक्रियता बढ़ाने की तैयारी है।

​आदिवासी क्षेत्रों और मोर्चों की लगातार समीक्षा

​रणनीति के तहत आदिवासी बहुल विधानसभा क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता सूची में रखा गया है। इन क्षेत्रों में वरिष्ठ नेताओं के निरंतर प्रवास तय किए जाएँगे और स्थानीय प्रभावशाली आदिवासी चेहरों को संगठन से जोड़ा जाएगा, जिससे सीधा जनसंवाद कायम हो सके। इसके साथ ही भाजपा के सभी सहयोगी मोर्चों व प्रकोष्ठों के कामकाज की प्रत्येक 2 माह में नियमित समीक्षा की जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मोर्चों के पदाधिकारी केवल चुनावी दिनों में सक्रिय न रहें, बल्कि वे हर समय जनता के बीच रहकर संवाद और सेवा कार्य जारी रखें।

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