
जबलपुर। मध्य प्रदेश में बिजली की अचानक मांग बढ़ने अथवा ग्रिड पर दबाव आने की स्थिति में कटौती का फैसला अब अधिकारी नहीं बल्कि स्वचालित मांग प्रबंधन व्यवस्था करेगी। यह नई कंप्यूटर आधारित प्रणाली वास्तविक समय में ग्रिड की स्थिति की सतत निगरानी करेगी। यदि ग्रिड की आवृत्ति 50 हर्ट्ज से नीचे चली जाती है और वितरण कंपनियां अपने तय कार्यक्रम से 12 प्रतिशत या 150 मेगावाट से अधिक बिजली लेने लगती हैं, तो 15 मिनट तक यह स्थिति बने रहने पर सिस्टम तुरंत सक्रिय हो जाएगा। इसके लागू होते ही मानवीय हस्तक्षेप के बिना खुद-ब-खुद संबंधित क्षेत्रों का भार कम किया जाएगा। हालात सामान्य होते ही स्वतः बिजली आपूर्ति बहाल भी होगी।
ग्रिड को सुरक्षित रखने के लिए कड़े मापदंड
अचानक बिजली की मांग बढ़ने और उपलब्धता घटने से ग्रिड की आवृत्ति पर सीधा प्रभाव पड़ता है। यदि समय रहते इस मांग को नियंत्रित नहीं किया जाए तो पूरे तंत्र के ठप होने की बड़ी आशंका बनी रहती है। वर्तमान समय में ऐसी गंभीर आपात स्थिति बनते ही अधिकारियों को जमीनी स्तर पर परिस्थितियों का आकलन करके निर्णय लेना पड़ता था, जिससे बहुमूल्य समय बर्बाद होता था। इसी तकनीकी समस्या के स्थायी समाधान के तौर पर नया निगरानी ढांचा तैयार किया गया है। इसका एकमात्र मुख्य उद्देश्य किसी खास इलाके में लंबे समय तक अनावश्यक ब्लैकआउट करना नहीं, बल्कि पूरे प्रांतीय पावर नेटवर्क को असंतुलित होने और बड़े नुकसान से पूरी तरह बचाना है।
सटीक भार प्रबंधन से रुकेगी अंधाधुंध कटौती
कंप्यूटर प्रणाली सक्रिय होते ही प्रत्येक बिजली वितरण कंपनी के लिए अलग-अलग लोड कम करने का स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया जाएगा। सभी नियंत्रण केंद्रों को तुरंत उन विशिष्ट समूहों या क्षेत्रों की डिजिटल सूची मिल जाएगी, जहां अस्थायी तौर पर विद्युत प्रवाह रोकना आवश्यक होगा। इस सुविचारित कदम से सभी इलाकों में एक समान अंधाधुंध कटौती नहीं होगी, बल्कि तय तकनीकी जरूरत के हिसाब से ही कदम उठाए जाएंगे। लोड शेडिंग का यह अनुपात तेजी से ग्रिड पर बढ़ते दबाव को घटाकर शून्य के करीब लाएगा। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मानवीय दखल नगण्य रहेगा, जिससे किसी भी प्रकार के पक्षपात अथवा प्रशासनिक चूक की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
हालात सामान्य होते ही खुद लौटेगी बिजली
इस पूरी ऑटोमैटिक व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण और राहत देने वाला पहलू स्वचालित बहाली प्रक्रिया है। जैसे ही ग्रिड में लोड की स्थिति स्थिर और सामान्य स्तर पर पहुंचेगी, पहले से बंद किए गए सभी उपभोक्ता फीडरों को तयशुदा नियमों के आधार पर तुरंत जोड़ दिया जाएगा। पूर्व व्यवस्था में लोड कम होने के बावजूद अधिकारियों के आदेश के अभाव में घंटों बिजली बंद पड़ी रहती थी। नए तंत्र में अब उपभोक्ताओं को आपातकाल समाप्त होने के बाद अवांछित कटौती का सामना बिल्कुल नहीं करना पड़ेगा।
