
जबलपुर। कटनी में दर्ज आपराधिक प्रकरण को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया की याचिका पर सुनवाई हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने राज्य सरकार को 21 सितंबर से पहले विस्तृत जवाब पेश करने का आदेश दिया है। कुठला थाने में पद के दुरुपयोग, धोखाधड़ी और जबरन जमीन हड़पने का केस दर्ज होने के बाद से निलंबित पुलिस अधिकारी नेहा पच्चीसिया, मुख्य फाइनेंसर क्षितिज राज बारापात्रे तथा मारूफ हनफी फरार हैं। याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल खरे और प्रियंक अग्रवाल ने पैरवी करते हुए दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई का तर्क दिया। वहीं अतिरिक्त महाधिवक्ता एच.एस. रूपराह तथा शासकीय अधिवक्ता अमित पांडेय ने फरार आरोपी को अंतरिम राहत देने का कड़ा विरोध किया।
हत्या मामले में दबाव बनाकर कराई औने-पौने रजिस्ट्री
कुठला थाना क्षेत्र में घटित कत्ल की एक वारदात के दौरान चालान पेश करने में जानबूझकर विलंब किया गया। इसके उपरांत हत्यारोपी पक्ष के परिजनों पर अनुचित दबाव निर्मित किया गया। इसी दबाव के चलते बाजार में 1 से 2 करोड़ रुपये कीमती भूखंड को महज 18 से 20 लाख रुपये में सहयोगियों के नाम रजिस्ट्री करा लिया गया।
फरार अफसर पर घोषित हुआ दस हजार इनाम
प्रकरण में विभागीय जांच की रिपोर्ट सामने आते ही मुख्यमंत्री के आदेश पर यह निलंबन आदेश जारी किया गया था। पुलिस प्रशासन ने फरार चल रही महिला अधिकारी की सूचना देने पर 10,000 रुपये का इनाम घोषित कर रखा है। देश छोड़कर बाहर जाने के खतरे को भांपते हुए पुलिस ने लुकआउट सर्कुलर जारी कराने की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है।
