
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के छोटे भाई शालिग्राम गर्ग को बड़ी राहत मिली है। न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ ने छतरपुर के कोड़ा गांव निवासी मोतीलाल कुशवाहा पर जानलेवा हमले व गोलीबारी के मामले में 50000 रुपये के निजी मुचलके पर सशर्त रिहाई स्वीकार कर ली। आरोपी 15 जुलाई 2026 से जेल में बंद था। पूर्व में छतरपुर जिला अदालत से याचिका निरस्त होने के बाद उच्च न्यायालय में अपील की गई थी। राज्य शासन की ओर से जमानत का तीखा विरोध दर्ज कराया गया, किंतु अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें और केस डायरी के बिंदुओं का अवलोकन कर आदेश जारी कर दिया। इससे आरोपी की रिहाई का रास्ता तैयार हो गया।
निचली अदालत से झटका लगने के बाद राहत
छतरपुर के राजनगर थाना अंतर्गत जमीन के झगड़े में मोतीलाल कुशवाहा पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला करने और पिस्तौल से फायरिंग करने के आरोप में पुलिस ने विभिन्न आपराधिक धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तारी की थी। इसके बाद आरोपी के वकीलों ने 25 अगस्त 2026 को छतरपुर जिला एवं सत्र न्यायालय में विशेष न्यायाधीश निधि सक्सेना के समक्ष जमानत की अर्जी लगाई थी। अवकाश के चलते इस पर 29 अगस्त को प्राथमिक बहस हुई थी। अभियोजन ने अपराध की गंभीरता और समाज पर पड़ने वाले प्रभाव का हवाला देकर अर्जी खारिज करने की मांग उठाई थी। साक्ष्यों के विश्लेषण के पश्चात जिला अदालत ने 31 अगस्त 2026 को आवेदन निरस्त कर दिया था, जिसके उपरांत हाईकोर्ट में दस्तक दी गई।
सख्त शर्तों के दायरे में मिली कानूनी मंजूरी
उच्च न्यायालय में हुई अंतिम बहस में बचाव पक्ष ने बताया कि प्रकरण की विवेचना पूर्ण हो चुकी है और अभिरक्षा की अवधि भी लंबी रही है। पीठ ने संतुलित रुख अपनाते हुए आदेश सुनाया कि आवेदक गवाहों को प्रभावित नहीं करेगा और नियमित तौर पर नियत पेशियों पर उपस्थित रहेगा। किसी भी नियम का उल्लंघन होने पर कानूनी लाभ तुरंत वापस ले लिया जाएगा। स्थानीय जेल प्रशासन को अदालत का प्रमाणीकरण आदेश मिलते ही औपचारिकताएं पूर्ण कर रिहा कर दिया जाएगा। वहीं, अधीनस्थ ट्रायल कोर्ट में इस मूल मामले से जुड़े अन्य सह-आरोपियों और विधिक प्रक्रियाओं की नियमित सुनवाई सामान्य रूप से जारी रहेगी।
