
जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की जबलपुर पीठ ने न्यायिक आदेशों की लगातार हो रही अनदेखी पर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए दो लापरवाह आईएएस अधिकारियों विवेक पोरवाल और संदीप जीआर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होने का फरमान जारी किया है। न्यायमूर्ति विवेक जैन की एकलपीठ ने यह कड़ा कदम सागर कार्यालय में पदस्थ शीला सेन की ओर से सेवा के नियमितीकरण को लेकर दायर याचिका की सुनवाई के दौरान उठाया है। इस संवेदनशील प्रकरण में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता कविता गुप्ता ने दमदार पैरवी की। दोनों अधिकारी अपने करियर के दौरान जबलपुर में भी सेवाएं दे चुके हैं। अदालत के इन सख्त आदेशों का पालन कराने की सीधी जिम्मेदारी भोपाल पुलिस कमिश्नर और सागर पुलिस अधीक्षक को सौंपी गई है।
प्रशासनिक विफलता के चलते अधिकारियों की बढ़ी मुश्किलें
निर्धारित समयसीमा बीत जाने के बाद भी प्रशासनिक मशीनरी द्वारा उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया और अदालत में कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया। पूर्व में 19 मार्च 2025 को राज्य शासन और संबंधित विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे जिसके तहत समूचे मामले का निराकरण 90 दिनों के भीतर सुनिश्चित करने को कहा गया था। तय सीमा पूरी होने के बाद भी प्रशासनिक स्तर पर इस महत्वपूर्ण आदेश को फाइलों में दबा दिया गया। विभाग ने न तो कोई अंतिम निर्णय लिया और न ही न्यायालय को वास्तविक स्थिति से अवगत कराया। पूर्व में दी गई तमाम हिदायतों के बावजूद अधिकारियों की कान पर जूं तक नहीं रेंगी जिससे क्षुब्ध होकर याचिकाकर्ता को दोबारा न्याय के लिए उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
पुलिस अधिकारियों को वारंट तामील कराने का जिम्मा
अधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार सागर रजिस्ट्रार कार्यालय की तरफ से 3 दिसंबर 2025 को राज्य रजिस्ट्री को पत्र भेजकर संपर्क अधिकारी नियुक्त करने की बात कही गई थी लेकिन धरातल पर न तो किसी जिम्मेदार की तैनाती हुई और न ही अदालत के समक्ष कोई अधिकृत रिपोर्ट पेश की गई। न्यायमूर्ति की बेंच ने इस लचर कार्यशैली को शासन व्यवस्था की पूर्ण विफलता करार दिया है। अदालत ने चेतावनी देते हुए साफ कर दिया कि लगातार अवसर मिलने के बावजूद कार्यप्रणाली में सुधार न होना गंभीर लापरवाही है। अब आगामी 21 सितंबर की तारीख मुकर्रर करते हुए पुलिस के शीर्ष अधिकारियों को जमानती वारंट तामील कराकर दोनों अफसरों की अनिवार्य रूप से कोर्ट में उपस्थिति सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
