
जबलपुर। कटनी की निलंबित नगर पुलिस अधीक्षक नेहा पच्चीसिया ने अपने ऊपर दर्ज आपराधिक मुकदमे को रद्द करवाने के लिए मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की शरण ली है। कुठला थाने में दर्ज इस प्रकरण के तहत कन्हवारा क्षेत्र स्थित 1.07 करोड़ रुपये मूल्य के भूखंड को केवल 18 लाख रुपये में रजिस्ट्री कराने का गंभीर आक्षेप उन पर लगा है। जिला एवं सत्र न्यायालय कटनी द्वारा अग्रिम जमानत याचिका निरस्त किए जाने के बाद उन्होंने राहत पाने के लिए जबलपुर स्थित मुख्य पीठ का रुख किया। इस मामले में उनके कुछ अन्य सहयोगी भी संदेही हैं। उच्च न्यायालय ने इस याचिका को विचारार्थ स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 16 सितंबर 2026 तय की है।
करोड़ों की भूमि पर हुए खेल की पड़ताल
कटनी के कन्हवारा इलाके में स्थित इस संपत्ति के मूल्यांकन और वास्तविक भुगतान के बड़े अंतर ने राजस्व विभाग व पुलिस प्रशासन के कान खड़े कर दिए। दस्तावेज जांच में यह स्पष्ट पाया गया कि बाजार दर के मुकाबले रजिस्ट्री मूल्य को अत्यंत निम्न स्तर पर दर्शाया गया था। इस भारी वित्तीय हेरफेर के सार्वजनिक होते ही शासन ने अनुशासनहीनता व पद के दुरुपयोग के आधार पर अधिकारी को पदमुक्त करते हुए जांच कुठला थाना पुलिस को सौंपी थी। पुलिस टीम अब विक्रय विलेख तैयार करने वाले गवाहों, बिचौलियों और बैंक लेन-देन से जुड़े समस्त कागजातों को कब्जे में लेकर कड़ी से कड़ी जोड़ रही है। राजस्व हानि से जुड़े इस अपराध में सम्मिलित अन्य पक्षों की भूमिका का सूक्ष्म परीक्षण चल रहा है।
उच्च अदालत में तय होगी आगे की राह
अधीनस्थ अदालत से गिरफ्तारी पूर्व संरक्षण न मिलने के बाद उच्च न्यायालय में दाखिल इस नई अर्जी में समस्त आरोपों को आधारहीन और दुर्भावनापूर्ण ठहराने का प्रयास हुआ है। याचिकाकर्ता का पक्ष है कि यह प्रकरण विभागीय स्तर पर द्वेषवश तैयार किया गया है, जिसका विधि सम्मत आधार अत्यंत कमजोर है। आगामी 16 तारीख को होने वाले विधिक मंथन के दौरान अदालत यह तय करेगी कि पुलिस विवेचना जारी रहनी चाहिए या फिर दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट पर स्थगन आदेश दिया जाए। वर्तमान में राज्य शासन की ओर से भी मामले में प्रभावी पैरवी की तैयारी पूरी कर ली गई है ताकि जांच निष्पक्ष दिशा में आगे बढ़ सके।
