
जबलपुर। शहर की चरमराई यातायात व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी ट्रैफिक सिग्नलों का संचालन नगर निगम को सौंपने के निर्देश दिए हैं। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पी.जी. नाजपांडे और समाजसेवी रजत भार्गव की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने यह कड़ा आदेश पारित किया है। इस मामले में याचिकाकर्ताओं के प्रमुख अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने कोर्ट को शहर की गंभीर समस्याओं से विस्तार से अवगत कराया, जबकि शासन की ओर से उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने अपना पक्ष रखा और सरकार के सकारात्मक रुख को पूरी तरह से स्पष्ट किया ताकि आम जनता को हो रही परेशानियों का स्थायी समाधान निकाला जा सके।
ये है नई व्यवस्था का ब्लूप्रिंट
हाईकोर्ट के इस सख्त निर्देश के बाद अब शहर के तमाम ट्रैफिक सिग्नलों के रखरखाव और सुचारु संचालन की जिम्मेदारी पूरी तरह से नगर निगम के कंधों पर आ गई है। इस व्यवस्था को चलाने के लिए ट्रैफिक पुलिस और जबलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड मिलकर प्रत्येक ट्रैफिक सिग्नल के रखरखाव के एवज में नगर निगम को सालाना 1.50 लाख रुपए उपलब्ध कराएंगे। इससे पहले शहर के सिग्नल तीन अलग-अलग एजेंसियों के नियंत्रण में बंटे हुए थे, जिसमें स्मार्ट सिटी के पास 6, नगर निगम के पास 5 और मध्य प्रदेश पुलिस के पास 10 ट्रैफिक सिग्नल संचालित हो रहे थे। एजेंसियों के बीच आपसी तालमेल और समन्वय की भारी कमी के कारण यह व्यवस्था पूरी तरह लड़खड़ा गई थी। सिग्नलों के लंबे समय तक बंद रहने से जहां जनता परेशान थी, वहीं हर महीने लगभग 5 लाख रुपए के ई-चालान राजस्व का बड़ा नुकसान भी सरकार को उठाना पड़ रहा था।
सड़क से अतिक्रमण हटाने के सख्त आदेश
याचिका पर हुई सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार की तरफ से 27 जुलाई 2026 को आयोजित एक उच्च स्तरीय संयुक्त बैठक के मिनिट्स कोर्ट में पेश किए गए। जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में जबलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के सह-अध्यक्ष, नगर निगम कमिश्नर, स्मार्ट सिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और यातायात अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने भाग लिया था, जहां सिग्नलों की जिम्मेदारी नगर निगम को सौंपने पर आम सहमति बनी थी। डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि शहर में यातायात के सुचारु प्रवाह को बनाए रखने के लिए सभी प्रकार के अतिक्रमण और अन्य बाधाओं को कड़ाई से हटाया जाए ताकि नागरिकों को ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिल सके। इस अहम मामले की अगली सुनवाई अब आगामी 7 सितंबर 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में तय की गई है।
