मोबाइल हैक और ओटीपी का झांसा, खातों से लाखों पार

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Newzo - News Editor 78 Views
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जबलपुर। दो अलग-अलग थाना क्षेत्रों में साइबर अपराधियों ने आम नागरिकों की गाढ़ी कमाई पर डाका डाल दिया है। रांझी थाना क्षेत्र के शंकर नगर बड़ा रांझी निवासी 31 वर्षीय नवीन गुप्ता के साथ मोबाइल हैकिंग की गंभीर घटना हुई है। शिकायत के मुताबिक 09-06-26 को अज्ञात आरोपी ने नवीन का मोबाइल हैक कर उनके यूनियन बैंक खाते से कुल 1 लाख 90 हजार रुपये पार कर दिए। इसी तरह की दूसरी वारदात खमरिया थाना अंतर्गत घाना निवासी 32 वर्षीय शैलेन्द्र श्रीवास्तव के साथ घटी। शातिर ने खुद को भारतीय स्टेट बैंक का कर्मचारी बताकर शैलेन्द्र को क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का झांसा दिया। विश्वास में आए शैलेन्द्र ने जैसे ही ओटीपी साझा किया, आरोपी ने उनके एसबीआई बैंक खाते से 1 लाख 83 हजार 343 रुपये निकाल लिए। पुलिस ने दोनों मामलों में प्रकरण दर्ज कर छानबीन तेज कर दी है।

​मोबाइल हैक कर बैंक खाते से उड़ाए पैसे

​नवीन गुप्ता के साथ हुई घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। नवीन को घटना के दिन अचानक अपने मोबाइल पर बैंक से राशि कटने के कई संदेश प्राप्त हुए। जब उन्होंने जांच की तो पाया कि उनका फोन पूरी तरह से हैक हो चुका है और अपराधी बैकएंड से सभी लेनदेन नियंत्रित कर रहे हैं। बिना किसी ओटीपी को साझा किए इतनी बड़ी रकम का ट्रांसफर होना किसी बड़ी तकनीकी चूक या मैलवेयर हमले की ओर इशारा करता है। फिलहाल रांझी पुलिस उन खातों की जानकारी जुटा रही है जिनमें नवीन की रकम भेजी गई है। पुलिस तकनीकी टीम की मदद से उस सर्वर को ट्रेस करने का प्रयास कर रही है जहां से नवीन का मोबाइल हैक किया गया था।

​क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़वाने के बहाने ठगी

​शैलेन्द्र श्रीवास्तव के साथ हुई धोखाधड़ी में साइबर अपराधी ने बेहद चालाकी से काम लिया। ठग ने खुद को बैंक का अधिकृत प्रतिनिधि बताकर शैलेन्द्र को फोन किया और क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का प्रलोभन दिया। शैलेन्द्र को जरा भी संदेह नहीं हुआ कि वह किसी अपराधी से बात कर रहे हैं। जैसे ही शैलेन्द्र ने बैंक की प्रक्रिया समझकर ओटीपी बताया, वैसे ही उनके खाते से 1 लाख 83 हजार 343 रुपये तुरंत डेबिट हो गए। खमरिया पुलिस के अनुसार यह एक सोची-समझी साजिश है जिसका उद्देश्य लोगों को झांसे में लेना है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि बैंक कभी भी फोन पर ओटीपी नहीं मांगते हैं। अब पुलिस संदिग्ध मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिपोर्ट के माध्यम से आरोपियों के नेटवर्क को खंगाल रही है।

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