
जबलपुर। शताब्दीपुरम इलाके में उच्च न्यायालय के निर्देश पर जबलपुर विकास प्राधिकरण और नगर निगम की संयुक्त टीम द्वारा सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई ने सत्ताधारी दल के भीतर ही राजनीतिक घमासान मचा दिया है। कार्रवाई के दौरान उत्तर-मध्य विधानसभा क्षेत्र से भारतीय भाजपा के विधायक अभिलाष पांडे अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे और इसका कड़ा विरोध किया। स्थानीय लोगों ने सड़क पर चक्काजाम कर दिया और महिलाओं ने बरसात के मौसम में बेघर होने पर गंभीर सवाल उठाए। विधायक अभिलाष पांडे ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि दो सौ परिवारों को उजाड़ा गया तो सभी प्रभावित लोगों को सीधे जबलपुर विकास प्राधिकरण के कार्यालय ले जाकर मुख्य कार्यकारी अधिकारी के कमरे में सुला दिया जाएगा। उनका कहना था कि गर्मी और सर्दी में अधिकारियों ने कोई सुध नहीं ली और अब बरसात में गरीबों को सड़क पर लाया जा रहा है। दूसरी ओर जबलपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष संदीप जैन व तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी दीपक कुमार वैद्य ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई वर्ष 2016 में शिक्षा समिति को सौंपी गई करोड़ों रुपए की जमीन पर न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए की जा रही थी और अतिक्रमणकारियों को लंबे समय से नोटिस दिए जा रहे थे। इस पूरी कार्रवाई के दौरान प्राधिकरण के अध्यक्ष संदीप जैन और विधायक अभिलाष पांडे के आमने-सामने आने से राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है और अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भाजपा संगठन इस अंदरूनी कलह पर क्या रुख अपनाता है।
बारिश में बेघर हुए दो सौ परिवार
अचानक हुई इस कार्रवाई से दो सौ से अधिक परिवार खुले आसमान के नीचे आ गए हैं। प्रशासन को कार्रवाई करने से पहले विस्थापन और रहने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी। महिलाओं ने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर खुलकर नाराजगी जाहिर की और कहा कि इस बारिश के मौसम में वे अपने छोटे-छोटे बच्चों को लेकर कहां जाएं। विधायक अभिलाष पांडे ने मौके पर पहुंचकर साफ शब्दों में अधिकारियों को चेतावनी दी कि गरीबों के साथ इस तरह का अन्याय कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि होने के नाते वे जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से सवाल किया कि आखिर ठंड और गर्मी के दिनों में यह अमला क्यों सोया हुआ था और बरसात शुरू होते ही गरीबों के आशियाने क्यों तोड़े जा रहे हैं।
अदालत के आदेश पर अड़े प्रशासनिक अधिकारी
जबलपुर विकास प्राधिकरण के तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी दीपक कुमार वैद्य ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि यह जमीन वर्ष 2016 में ही एक शिक्षा समिति को कानूनी प्रक्रिया के तहत हस्तांतरित कर दी गई थी। इस जमीन पर लंबे समय से अवैध कब्जा जमाए बैठे लोगों को प्राधिकरण की तरफ से लगातार नोटिस जारी किए जा रहे थे, लेकिन इसके बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाया गया। मामला उच्च न्यायालय में पहुंचने के बाद अदालत की तरफ से जमीन को पूरी तरह खाली कराने के सख्त निर्देश दिए गए थे। अधिकारियों का यह भी कहना है कि वे केवल अदालत के आदेशों का पालन कर रहे हैं और इसमें किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत दुर्भावना नहीं है। जबलपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष संदीप जैन ने भी स्पष्ट किया कि यह पूरी कार्रवाई जिला प्रशासन और पुलिस बल की मौजूदगी में पूरी तरह कानूनी दायरे में रहकर की गई है।
लोगों ने किया चकाजाम, पुलिस बल तैनात
कार्रवाई शुरू होते ही स्थानीय लोगों ने मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। स्थिति को संभालने के लिए भारी पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। विधायक अभिलाष पांडे के आक्रामक तेवर और प्रशासनिक अधिकारियों की दलीलों के बीच आम जनता पिसती नजर आई। विस्थापन के बिना हुई इस तोड़फोड़ कार्रवाई ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर अदालत के आदेश और मानवीय संवेदनाओं के बीच तालमेल क्यों नहीं बैठ पाया।
