
गबन की रकम बरामद करने में जुटी पुलिस
पांच नामजद आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज
जबलपुर। नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में सामने आए 1,63,78,000 रुपये के ओपीडी पर्ची और छात्र फीस गबन मामले में गढ़ा पुलिस ने फरार आरोपी मनोहर केवट को गिरफ्तार कर लिया है। मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. नवनीत सक्सेना द्वारा दर्ज कराई गई रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने 5 आरोपियों पर प्रकरण दर्ज किया था। सीएसपी आशीष जैन के अनुसार इस कार्रवाई के बाद अब तक 4 आरोपी जेल की सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं, जिनमें कैश विभाग के पूर्व में पकड़े गए अरविंद धुर्वे, विशाल सराठे और भानु सिंह शाक्यवार शामिल हैं। मामले में नामजद पांचवीं आरोपी साधना चंदौल अभी भी फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम अलग-अलग संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश देकर छापेमारी कर रही है।
रसीद बुक और बैंक रिकॉर्ड में भारी हेरफेर
अस्पताल प्रबंधन की कैश शाखा में आने वाले मरीजों की आईपीडी, ओपीडी पर्ची और मेडिकल विद्यार्थियों के शिक्षण शुल्क की नकद वसूली मनी रसीद बुक के जरिए होती थी। इस व्यवस्था में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए कॉलेज स्तर पर एक विशेष आंतरिक जांच समिति बनाई गई। जांच दल ने 1 अप्रैल 2020 से 30 नवंबर 2025 तक के 5 वर्षों से अधिक समय के आय-व्यय और बैंक स्टेटमेंट की सूक्ष्मता से पड़ताल की। इस दौरान रसीद बुक के माध्यम से एकत्र की गई कुल नकद राशि और अधिकृत बैंक खातों में वास्तव में जमा की गई रकम के आंकड़ों में भारी अंतर उजागर हुआ। सरकारी खजाने में जमा होने वाली यह राशि सीधे कर्मचारियों की मिलीभगत से गायब कर दी गई थी।
फरार महिला की गिरफ्तारी हेतु पुलिस सक्रिय
कानूनी शिकंजे में आए आरोपियों से पुलिस रिमांड के दौरान गबन की गई राशि की बंदरबांट और फर्जीवाड़े के तौर-तरीकों के बारे में गहन पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक पड़ताल में यह तथ्य भी खंगाला जा रहा है कि इस नेटवर्क में किसी अन्य कर्मचारी या बाहरी व्यक्ति का सहयोग तो नहीं था। विवेचना अधिकारी फरार महिला के परिजनों और संभावित शरणदाताओं पर भी नजर बनाए हुए हैं। पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि वित्तीय अनियमितता के इस बड़े मामले में सभी साक्ष्य जुटाकर जल्द ही ठोस चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा ताकि दोषियों को सख्त सजा दिलाई जा सके।
