
आगरा। उत्तर मध्य रेलवे आगरा मंडल के विद्युत विभाग में कार्यरत लोको पायलट गुड्स जितेन्द्र कुमार मीना के खिलाफ बिना टिकट यात्रा का केस दर्ज हुआ है। 1 अगस्त को गाड़ी संख्या 22988 अजमेर एक्सप्रेस में भरतपुर के पास विशेष मजिस्ट्रेट चेकिंग अभियान के दौरान चेकिंग दस्ते ने कागजी पास न होने पर उन्हें पकड़ा। दस्ते ने रेल अधिनियम की धारा 137 के तहत कार्रवाई की। इसके बाद भरतपुर रेलवे न्यायालय के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने नोटिस संख्या 661 जारी कर कर्मचारी को गुरुवार सुबह 11 बजे व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश सुनाया। यह पूरा विवाद रेलवे बोर्ड के नए डिजिटल नियमों और चेकिंग दस्ते के बीच तालमेल की कमी से उपजा है।
वैध डिजिटल रिकॉर्ड से खुला ड्यूटी का सच
इस मामले में मुख्य क्रू नियंत्रक कार्यालय ईदगाह के स्पष्टीकरण और एचआरएमएस रिकॉर्ड ने सच्चाई सामने रखी है। आगरा यातायात विभाग ने टीओ संख्या 46 के तहत लोको पायलट जितेन्द्र कुमार को ट्रेन 22988 में स्पेयर क्रू ड्यूटी के लिए विधिवत बुक किया था। ड्यूटी यात्रा के लिए कर्मचारी ने समय रहते एचआरएमएस पोर्टल पर डिजिटल पास के लिए आवेदन किया था। इस आवेदन की विधिवत जांच करने के बाद चीफ लोको इंस्पेक्टर आलोक कुमार कुशवाहा ने 1 अगस्त को यात्रा शुरू होने से ठीक पहले डिजिटल पास जारी कर दिया था। इस प्रकार लोको पायलट अधिकृत आदेश और डिजिटल पास के साथ अपने कर्तव्य पर रवाना हुए थे।
बोर्ड का नया नियम बना सबसे बड़ा आधार
रेलवे बोर्ड के संयुक्त निदेशक जया कुमार जी द्वारा 15 जुलाई 2026 को जारी आदेश संख्या पीसी-7/2024/एचआरएमएस/38(पीटी) के तहत व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। नए नियमों के अंतर्गत रेलवे के सभी पारंपरिक मैनुअल और कागजी ड्यूटी चेक पास पूरी तरह प्रतिबंधित किए जा चुके हैं। अब 100% ड्यूटी पास केवल एचआरएमएस डिजिटल मॉड्यूल से ही जारी किए जाते हैं। यह डिजिटल व्यवस्था रेल वन मोबाइल ऐप से सीधे लिंक है, जिससे यात्रा की ऑनलाइन पुष्टि होती है। मैदानी चेकिंग अमले द्वारा इस डिजिटल पास को नजरअंदाज करने के कारण यह कानूनी स्थिति बनी। अब सक्षम स्तर से जारी यह सभी साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जा रहे हैं।
