रेल में अवैध वसूली का सफर: अटेंडेंट सीट के लिए 2 से 3 हजार और लिनेन कैबिनेट के लिए 3 से 5 हजार की मांग

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Newzo - News Editor 44 Views
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शिकायत के बाद भी टीटीई ने नहीं की कार्रवाई, यात्रियों ने लगाया अनदेखी का आरोप

मुख्यालय में बैठकर भी ट्रेनों में चल रहे इस बड़े खेल से अनजान बने रहे जिम्मेदार

अफसर, यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ताक पर रखकर कोच के भीतर बेची जा रही जगह

जबलपुर। भीषण गर्मी के इस मौसम में छुट्टियों के चलते ट्रेनों में भारी भीड़ उमड़ रही है, जिससे यात्रियों के लिए कंफर्म टिकट पाना पूरी तरह नामुमकिन हो चुका है। इसी मजबूरी का फायदा उठाकर जबलपुर से गुजरने वाली ट्रेनों में कोच अटेंडेंट और टीटीई अवैध वसूली के नए-नए रास्ते निकाल रहे हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार से मुंबई तथा दक्षिण भारत की ओर जाने वाली ट्रेनों में चादर-तौलिया (लिनेन) रखने की जगह और अटेंडेंट के लिए आरक्षित बर्थ को महंगे दामों पर बेचा जा रहा है। रेलवे प्रशासन की घोर अनदेखी के बीच यह कालाबाजारी खुलकर चल रही है, जहां मजबूर यात्रियों से 2 से 3 हजार रुपये अटेंडेंट बर्थ के लिए और 3 से 5 हजार रुपये लिनेन रखने वाली संकरी जगह के लिए वसूले जा रहे हैं। जबलपुर से मुंबई की ओर जाने वाली पवन एक्सप्रेस में सफर कर रहे एक पीड़ित यात्री ने जब इसकी शिकायत ट्रेन के टीटीई से की, तो उसने मामले को पूरी तरह अनसुना कर दिया, जो इस पूरे खेल में रेलकर्मियों की मिलीभगत को साफ दर्शाता है।

​जांच दलों की निष्क्रियता से बेखौफ हुए भ्रष्ट कर्मचारी

​जबलपुर रेल मंडल में विजिलेंस और सीसीएम स्क्वाड जैसी बड़ी जांच एजेंसियों के मुख्यालय मौजूद हैं। इसके बावजूद ट्रेनों में चल रहे इस अवैध कारोबार पर कोई लगाम नहीं कस पा रही है। ये दोनों ही जांच दल पूरी तरह मूकदर्शक बने बैठे हैं और स्टेशन पर होने वाली इस खुली लूट पर आंखें मूंद चुके हैं।

​अफसरों की सेवा में व्यस्त है चेकिंग दस्ता

​सीसीएम स्क्वाड की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। यह दस्ता ट्रेनों में टिकट चेकिंग और भ्रष्टाचार रोकने के बजाय केवल वाणिज्य विभाग के बड़े अधिकारियों के प्रोटोकॉल को संभालने और उनकी सेवा करने में ही व्यस्त रहता है। आम जनता की शिकायतों से इनका कोई सरोकार नहीं रह गया है।

​केवल एक औचक निरीक्षण खोल सकता है पोल

​जबलपुर स्टेशन पर विजिलेंस निरीक्षकों की एक बड़ी फौज तैनात है। यदि यह टीम सिर्फ एक बार स्टेशन पर आकर मुंबई और दक्षिण भारत की ओर जाने वाली ट्रेनों का औचक निरीक्षण कर ले, तो कोच के भीतर चल रही इस अवैध वसूली की पूरी हकीकत और यात्रियों का दर्द खुद-ब-खुद सामने आ जाएगा।

​गोंडवाना एक्सप्रेस के मामले से भी नहीं लिया सबक

​गर्मी के सीजन में यात्रियों की बेबसी टीटीई और अटेंडेंट के लिए मोटी कमाई का जरिया बन चुकी है। हाल ही में गोंडवाना एक्सप्रेस के टीटीई द्वारा की गई अवैध वसूली का मामला भी जमकर सुर्खियों में छाया हुआ था। उस बड़ी घटना के बाद भी रेल प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया और ट्रेनों में दलाली का यह खेल बदस्तूर जारी है।

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