जबलपुर यूनिवर्सिटी का अस्तित्व खतरे में, 250 करोड़ के रिजर्व फंड पर छिड़ी जंग

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Newzo - News Editor 32 Views
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मुख्यमंत्री के एलान पर उठे सवाल, जबलपुर को मिल रहा सिर्फ नाममात्र का बजट

जबलपुर। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के बैनर तले आज कॉफी हाउस में हुई एक अहम बैठक के दौरान डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने चिकित्सा विश्वविद्यालय के विभाजन और फंड वितरण पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इस बैठक में रजत मार्गव, डॉ. ए.बी. श्रीवास्तव, सुभाष चन्द्रा, टी.के. रायघटक, एड. वेदप्रकाश अथौलिया, संतोष श्रीवास्तव, डी.के. सिंह, एड. घनश्याम सोनकर, यशवंत कोष्टा, डी.आर. लखेरा, अशोक यादव, श्याम सोलंकी, एड. बृजेश साहू तथा राममिलन शर्मा शामिल हुए। वक्ताओं ने बताया कि 20 जुलाई को विधानसभा सचिवालय के राजपत्र में प्रकाशित विधेयक के मुताबिक उज्जैन को 6 संभाग, 70 कॉलेज और 60000 छात्र मिल रहे हैं, जबकि जबलपुर को मात्र 4 संभाग, 15 कॉलेज और 12000 छात्र मिल रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय स्तर पर अब भारी असंतोष लगातार बढ़ता ही जा रहा है।

चिकित्सा विश्वविद्यालय के बजट में भारी असमानता
​इस नए और भेदभावपूर्ण बजट प्रावधान के तहत कुल 110 करोड़ का बजट तय किया गया है, जिसमें से जबलपुर के हिस्से में केवल 10 करोड़ की राशि आ रही है। इसके अलावा वर्तमान चिकित्सा विश्वविद्यालय के पास मौजूद 250 करोड़ के भारी-भरकम रिजर्व फंड के बंटवारे की भी योजना चुपचाप बनाई जा रही है। इस प्रस्तावित और एकतरफा बंटवारे के अंतर्गत लगभग 200 करोड़ उज्जैन को दिए जाने की तैयारी चल रही है और जबलपुर को मात्र 50 करोड़ रुपए मिलने की बात सामने आ रही है। मंच के सभी अनुभवी सदस्यों ने पुरजोर तरीके से चेताया है कि इस प्रकार के अन्यायपूर्ण और पक्षपातपूर्ण फैसलों से जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा और मुख्यमंत्री द्वारा 1 अगस्त को दिए गए उस बड़े बयान का कोई भी व्यावहारिक औचित्य नहीं बचेगा जिसमें उन्होंने जबलपुर यूनिवर्सिटी को एम्स के स्तर का बनाने की बात कही थी।

मुख्यमंत्री के वादों पर तुरंत ठोस निर्णय लें
​नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की तरफ से यह अत्यंत स्पष्ट रूप से और कड़े शब्दों में मांग की गई है कि मेडिकल यूनिवर्सिटी के इस पक्षपातपूर्ण विभाजन और फंड के असमान बंटवारे को तत्काल प्रभाव से रोका जाना चाहिए। जबलपुर और उज्जैन दोनों ही क्षेत्रों को यूनिवर्सिटी के विभाजन में बिल्कुल बराबर के हिस्से दिए जाने चाहिए ताकि जबलपुर यूनिवर्सिटी आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बन सके। यदि समय रहते इन तमाम वित्तीय मामलों में उचित सुधार नहीं किया गया तो मुख्यमंत्री का यह कथन केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगा और जबलपुर के हजारों छात्रों का भविष्य बुरी तरह प्रभावित हो जाएगा। इन सभी बेहद गंभीर मुद्दों को लेकर एक विस्तृत ज्ञापन तैयार कर शासन को भेज दिया गया है, जिस पर शीघ्र ही कोई ठोस कार्रवाई न होने पर आंदोलन को और अधिक तेज किया जाएगा।

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