
स्टेशन पर मुसाफिर परेशान, पार्सल माफिया का बोलबाला
जबलपुर। पश्चिम मध्य रेलवे के अंतर्गत जबलपुर रेलवे स्टेशन से निकलने वाली रेलगाड़ियों में बिना अनुमति खानपान सामग्री बेचने वालों की भारी मौजूदगी से मुसाफिरों की सेहत खतरे में पड़ रही है। स्टेशन पर कुल 6 प्लेटफॉर्म मौजूद हैं, लेकिन निर्धारित ट्रैक खाली होने के बाद भी गाड़ियों के आगमन स्थल को अचानक बदल दिया जाता है। इस फेरबदल के पीछे पार्सल और भारी सामान की लोडिंग व्यवस्था से जुड़े अनुचित लाभ के आरोप सामने आ रहे हैं। रेलवे प्रशासन ने संसद में दी जानकारी में 2017 से जून 2021 के दौरान धारा 144 के तहत 2985 अवैध विक्रेताओं पर कार्रवाई का दावा किया था, फिर भी 2026 में कोचों के भीतर बासी और असुरक्षित भोजन की खुली बिक्री जारी है।
बोगियों में बिना रोकटोक घूम रहे बाहरी वेंडर
सवारी डिब्बों में सफर के दौरान प्रत्येक कोच में 5 से 6 अनाधिकृत फेरीवाले बेरोकटोक प्रवेश कर रहे हैं। इनके पास प्रशासन द्वारा तय क्यूआर कोड वाला पहचान पत्र नहीं होता है। गाड़ी के रुकते ही यह लोग चाय, नाश्ता और भोजन की थैलियां लेकर यात्रियों तक पहुंच जाते हैं। तय मानकों के विपरीत तैयार खाद्य पदार्थों के भंडारण और शुद्धता की कोई पड़ताल नहीं की जाती। इससे सफर कर रहे लोगों को मजबूरी में अस्वच्छ आहार ग्रहण करना पड़ता है।
खाली ट्रैक छोड़ दूसरे प्लेटफार्म पर आ जाती हैं ट्रेनें
स्टेशन परिसर में जगह की कोई कमी न होने पर भी अक्सर ट्रेनों के रुकने की जगह ऐन वक्त पर बदल दी जाती है। एक नंबर पर आने वाली गाड़ियों को अचानक अन्य ट्रैक पर ले जाने से यात्रियों में भारी अफरातफरी मचती है। बुजुर्गों और बच्चों को सामान लेकर एक सिरे से दूसरे सिरे तक भागना पड़ता है। इस पूरी प्रक्रिया की कोई ठोस तकनीकी वजह सार्वजनिक तौर पर यात्रियों को नहीं बताई जाती है।
पार्सल चढ़ाने-उतारने की व्यवस्था भी शक के घेरे में
गाड़ियों के अकारण डायवर्जन से पार्सल और लगेज उतारने वाले गिरोहों को सीधा फायदा पहुंचने का अंदेशा गहराता है। जिस ट्रैक से व्यावसायिक माल को बाहर ले जाना सुगम होता है, गाड़ियों को जानबूझकर वहीं रोका जाता है। मुसाफिरों की सुविधा को ताक पर रखकर माल ढुलाई के सिंडिकेट को लाभ पहुंचाया जा रहा है। कागजी जांच अभियानों से इतर अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और ठोस निगरानी की सख्त दरकार है।
