कंवलपुरा और दरा स्टेशनों के बीच हुआ बड़ा हादसा, प्रशासन ने दिए उच्च स्तरीय जांच के आदेश

जबलपुर। कोटा-नागदा रेलखंड पर कंवलपुरा और दरा स्टेशनों के बीच निर्माणाधीन रेलवे अंडर ब्रिज की मिट्टी अचानक ढह जाने से दो जिम्मेदार रेल इंजीनियरों की मौत हो गई। इस दुखद हादसे में रामगंजमंडी के 50 वर्षीय वरिष्ठ खंड अभियंता रेल पथ संजय झा और भवानी मंडी के 27 वर्षीय कनिष्ठ कार्य इंजीनियर प्रभात सिंह सोलंकी असमय काल के ग्रास में समा गए। यह गंभीर घटना गुरुवार देर शाम करीब 7.30 बजे उस समय घटित हुई जब दोनों अधिकारी कार्य की प्रगति का जायजा लेने के लिए मौके पर पहुंचे थे। हादसे के तुरंत बाद वहां उपस्थित कर्मचारियों ने तत्परता दिखाते हुए जेसीबी मशीन की मदद से भारी मात्रा में गिरी मिट्टी को हटाया और करीब 15 मिनट की मशक्कत के बाद दोनों अधिकारियों को बाहर निकाला। उन्हें अत्यंत नाजुक हालत में तत्काल श्रीजी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने प्रभात सिंह सोलंकी को मृत घोषित कर दिया, जबकि संजय झा ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। इस भीषण हादसे की सूचना मिलते ही डीआरएम अनिल कालरा सहित तमाम रेलवे शाखा अधिकारी अस्पताल पहुंचे और दोनों शवों को रात करीब 10.50 बजे एमबीएस अस्पताल की मोर्चरी भिजवाया, जहां उनका पोस्टमार्टम प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा।
अत्यधिक मानसिक दबाव और निरंतर चलने वाली बैठकों से कर्मचारी परेशान
इस हृदयविदारक घटना के बाद कोटा रेल मंडल के अधिकारियों और कर्मचारियों में गहरा आक्रोश व्याप्त हो गया है। कई रेल इंजीनियरों ने खुलकर यह बात सामने रखी है कि पिछले काफी समय से फील्ड में तैनात सुपरवाइजरों पर काम समय से पहले पूरा करने का जबरदस्त मानसिक और शारीरिक दबाव बनाया जा रहा है। महीनों के लंबे तकनीकी कार्यों को चंद दिनों के भीतर ही जबरन निपटाने के लिए उन पर निरंतर दबाव रहता है। स्थिति तब और अधिक विकट हो जाती है जब प्रशासनिक अधिकारी सीधे देर रात तक फोन करके मैदानी प्रगति की रिपोर्ट मांगते हैं, जिससे कर्मचारियों का पारिवारिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। इसके साथ ही अधिकारियों ने पूर्व में महाप्रबंधक से देर रात तक चलने वाली बैठकों की लिखित शिकायत की थी, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि इन अंतहीन बैठकों से सुपरवाइजरों में भारी अवсад बढ़ रहा है। ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर एसोसिएशन ने भी इस संबंध में अपनी गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई थीं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर इस व्यवस्था में कोई सुधार नहीं किया गया।
पांच वर्षों के भीतर दूसरा बड़ा हादसा और सुरक्षा मानकों की अनदेखी
कोटा रेल मंडल के अंतर्गत बीते पांच वर्षों के दौरान अंडर ब्रिज निर्माण के समय मिट्टी ढहने की यह दूसरी सबसे बड़ी और गंभीर घटना है। इससे पहले 3 मई 2021 को डकनिया स्टेशन के समीप एक निर्माणाधीन अंडर ब्रिज में भी इसी प्रकार की लापरवाही के चलते मिट्टी खिसक गई थी, जिसमें एक ट्रैकमैन वसीम खान की जान चली गई थी और लगभग पांच अन्य कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उस समय रेलवे बोर्ड विजिलेंस की 6 सदस्यीय उच्च स्तरीय टीम ने पूरे प्रकरण की जांच आरंभ की थी, परंतु उस जांच रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया और किसी भी दोषी अधिकारी पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई। इस वर्तमान हादसे के समय भी अंडर ब्रिज के ठीक ऊपरी हिस्से पर भारी जेसीबी मशीन का संचालन किया जा रहा था, जिसके अत्यधिक कंपन और वजन के दबाव के कारण अचानक भारी मात्रा में गीली मिट्टी नीचे काम देख रहे इंजीनियरों पर गिर गई, जो उनकी असमय मौत का मुख्य कारण बनी। फिलहाल प्रशासन ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने के निर्देश जारी किए हैं।
