जबलपुर: कजरवारा में 13 दिन बाद भी चोरी का सुराग नहीं, फिंगरप्रिंट रिपोर्ट अटकी

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Newzo - News Editor 71 Views
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जबलपुर। गोराबाजार पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत कजरवारा पुरानी बस्ती में 10 मई की रात श्री कंधी लाल उपाध्याय के सूने मकान में हुई बड़ी चोरी के 13 दिन बीत जाने के बाद भी आरोपी पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं। पीड़ित परिवार लगातार थाना प्रभारी कपिल शर्मा के संपर्क में है, लेकिन पुलिस विभाग की टीम द्वारा घटनास्थल से लिए गए फिंगरप्रिंट की रिपोर्ट अब तक गोराबाजार थाने को नहीं मिल सकी है। इस तकनीकी विफलता और देरी के कारण पुलिस चोरों की सटीक संख्या और पहचान का पता लगाने में असमर्थ है, जिससे स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है। शहर विकास संघर्ष समिति के पंडित राम दुबे, संजय यादव, अटल उपाध्याय, शेखर मिश्रा, मुकेश सिंह, संजय कपूर, विवेक शुक्ला, अरविंद दुबे, एडवोकेट विनीत उपाध्याय, राजेश यादव, राम शंकर शुक्ला और अन्नू पटेल मालगुजार ने इस सुस्त प्रशासनिक प्रक्रिया पर कड़ा विरोध जताते हुए जल्द से जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी और चोरी गए माल की बरामदगी की मांग की है।

​जांच में देरी, पुलिस का अनुमान

​घटना के बाद मौके पर पहुंची जांच टीम ने साक्ष्य जुटाए थे, परंतु फिंगरप्रिंट रिपोर्ट के अभाव में जांच की गति पूरी तरह थम गई है। पुलिस अधिकारियों का प्रारंभिक अनुमान है कि घर के भीतर रखी 2 गोदरेज की अलमारियों के मजबूत लॉक खोलने के लिए कम से कम 4 चोरों का गिरोह शामिल रहा होगा। यदि फिंगरप्रिंट की फोरेंसिक रिपोर्ट समय पर उपलब्ध हो जाती, तो चोरों की वास्तविक संख्या और उनके आपराधिक रिकॉर्ड का तुरंत खुलासा हो सकता था। इस रिपोर्ट के आधार पर पुलिस क्षेत्र के संदिग्धों या अलमारी तोड़ने वाले कुख्यात गिरोहों के सदस्यों को थाने बुलाकर कड़ाई से पूछताछ कर सकती थी, लेकिन तकनीकी साक्ष्य न होने से जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है।

​खोजी कुत्तों और खुफिया तंत्र को न बुलाने पर नाराजगी

​कजरवारा की आम जनता में इस बात को लेकर गहरा असंतोष है कि इतनी बड़ी वारदात के बाद भी पुलिस के खुफिया तंत्र और खोजी कुत्तों की सहायता क्यों नहीं ली गई। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि घटना के तुरंत बाद खोजी कुत्तों को खोजी अभियान में लगाया जाता, तो वे गंध के आधार पर चोरों का पीछा कर सकते थे। इसके अलावा, घटनास्थल से पुलिस को संदिग्धों के जूते भी बरामद हुए थे, जो जांच में एक बहुत बड़ा सुराग साबित हो सकते थे। समय पर उचित संसाधनों की व्यवस्था न होने और पुलिस के खुफिया तंत्र की निष्क्रियता के कारण अपराधी आसानी से भागने में सफल रहे।

​सुरक्षा व्यवस्था पर संकट,आक्रोश

​कजरवारा पुरानी बस्ती के निवासी इस समय गहरे खौफ और दहशत के साए में जीने को मजबूर हैं। स्थानीय पुलिस थाने में बल और कर्मचारियों की भारी कमी के कारण क्षेत्रों में नियमित गश्त नहीं हो पा रही है, जिससे लोग अपने घरों में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। गौरतलब है कि वारदात के दिन गृहस्वामी कंधी लाल उपाध्याय बिलहरी में अपने पुत्र के घर गए हुए थे। चोरों ने बड़ी चालाकी से बिना अलमारी तोड़े, केवल हुक के सहारे लॉक की रॉड को बाहर निकालकर लॉकर में रखे सोने की चैन, 4 अंगूठियां, हार वाला मंगलसूत्र, 4 सोने की चूड़ियां और भारी मात्रा में नकद राशि पार कर दी। नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस गिरोह का पर्दाफाश नहीं हुआ, तो क्षेत्र में असुरक्षा की भावना और अधिक गहरा जाएगी।

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