संभागीय आयुष अधिकारी अर्चना मरावी ने की निलंबन की पुष्टि, जांच पूरी होने तक मुख्यालय में उपस्थिति अनिवार्य

जबलपुर। न्यायालयीन कार्य में बड़ी लापरवाही बरतने के आरोप में भोपाल आयुष विभाग ने जबलपुर और नरसिंहपुर दोनों जिलों का प्रभार देख रहीं जिला आयुष अधिकारी डॉ सुरतना सिंह चौहान को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। यह कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई कोर्ट में चल रहे एक बेहद जरूरी शासकीय मामले में समय पर विभाग का प्रतिउत्तर दाखिल न करने के कारण पैदा हुए विवाद के बाद हुई है। संभागीय आयुष अधिकारी अर्चना मरावी ने इस निलंबन आदेश की पुष्टि करते हुए बताया कि आगामी जांच होने तक संबंधित अधिकारी को संभागीय मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। सरकारी नियमों के तहत अदालती तारीख के भीतर विभाग का पक्ष रखना बेहद जरूरी था, लेकिन जिला स्तर पर हुई इस भारी चूक ने शासन की साख को प्रभावित किया। उच्च प्रबंधन ने इसे शासकीय सेवा के प्रति घोर लापरवाही माना और सीधे जवाबदेही तय करते हुए सस्पेंशन का आदेश जारी कर दिया। इस बड़े फैसले से पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है।
अदालती तारीख बीतने पर भोपाल मुख्यालय ने लिया संज्ञान
यह पूरा विवाद कोर्ट में लंबित एक बेहद संवेदनशील मामले से जुड़ा है। कानूनी प्रक्रिया के तहत सभी सरकारी विभागों के लिए यह अनिवार्य होता है कि वे अदालत द्वारा तय की गई तय समयसीमा के भीतर ही अपना आधिकारिक जवाब पेश करें। इस प्रकरण में भी आयुष विभाग को निर्धारित तारीख के अंदर अपनी बात रखनी थी, लेकिन लगातार मिले निर्देशों के बावजूद जिला कार्यालय से जवाब नहीं भेजा गया। जब समयसीमा बीतने का यह गंभीर मामला भोपाल स्थित आयुष विभाग के उच्च अधिकारियों तक पहुंचा, तो उन्होंने पूरे घटनाक्रम की गहन समीक्षा की। इस समीक्षा में यह स्पष्ट हुआ कि जिला स्तर पर हुई ढिलाई के कारण ही समय पर दस्तावेज कोर्ट नहीं पहुंच पाए, जिससे सरकार की छवि पर असर पड़ा।
दोहरे जिले के कार्यभार से बिगड़ा प्रशासनिक तालमेल
निलंबित की गईं डॉ सुरतना सिंह चौहान के पास केवल जबलपुर जिले की जिम्मेदारी नहीं थी, बल्कि वे पड़ोसी जिले नरसिंहपुर के जिला आयुष अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रही थीं। इन 2 बड़े और महत्वपूर्ण जिलों की दोहरी प्रशासनिक कमान होने की वजह से उन पर कामकाज का दबाव बहुत अधिक था। इस बड़ी कार्रवाई के बाद अब विभाग के भीतर इस बात को लेकर भी मंथन शुरू हो गया है कि यह चूक अत्यधिक काम के बोझ के कारण हुई या फिर इसके पीछे व्यक्तिगत स्तर पर की गई प्रशासनिक लापरवाही जिम्मेदार थी। हालांकि मुख्यालय ने अतिरिक्त प्रभार को लेकर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, पर यह साफ कर दिया है कि काम की व्यस्तता को कानूनी कार्यों में देरी का बहाना नहीं बनाया जा सकता।
जांच कमेटी गठन की तैयारी, सख्त मॉनिटरिंग का मैसेज
संभागीय अधिकारी अर्चना मरावी द्वारा निलंबन की पुष्टि किए जाने के बाद अब आरोपी अधिकारी के खिलाफ विभागीय स्तर पर एक विस्तृत जांच कमेटी गठित करने की तैयारी चल रही है। इस त्वरित और कड़ी कार्रवाई के जरिए प्रदेश भर के सभी जिला आयुष अधिकारियों को यह स्पष्ट चेतावनी दे दी गई है कि वैधानिक कार्यों और अदालती मामलों में किसी भी प्रकार की सुस्ती को कतई सहन नहीं किया जाएगा। विभागीय सूत्रों के अनुसार, भविष्य में ऐसी अप्रिय स्थितियों और जवाबदेही से बचने के लिए विभाग के भीतर अब कानूनी मामलों की दैनिक निगरानी करने के लिए एक बिल्कुल नया और बेहद कड़ा डिजिटल सिस्टम भी लागू किया जा सकता है।
