
जबलपुर। मध्यप्रदेश सरकार ने नगरीय निकायों में नियमों को ताक पर रखकर मलाईदार कुर्सियों पर कब्जा जमाने वाले अफसरों और कर्मचारियों के सभी प्रभार आदेशों को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय के आयुक्त कैलाश वानखेड़े द्वारा जारी इस कड़े आदेश से नगर निगम, नगर पालिका और स्मार्ट सिटी कार्यालयों में खलबली मच गई है। इस ऐतिहासिक फैसले के दायरे में जबलपुर के कई रसूखदार नाम शामिल हैं, जिनमें अपर आयुक्त वित्त अशफाक कुरैशी को मिला मुख्य वित्त अधिकारी स्मार्ट सिटी का प्रभार, कार्यपालन यंत्री कमलेश श्रीवास्तव का अधीक्षण यंत्री नगर निगम का प्रभार और सहायक आयुक्त संभव अयाची का उपायुक्त नगर निगम का प्रभार तुरंत शून्य हो गया है। इसके अलावा उपयंत्री विद्युत अंकुर नाग और उपयंत्री सिविल संजय कुशवाहा का सहायक यंत्री अमृत योजना का प्रभार, उपयंत्री अभिनव मिश्र का सहायक यंत्री स्वच्छता सेल, उपयंत्री मनीष तड़से का उद्यान अधिकारी, उपयंत्री दीप्ति भानारिया का सहायक यंत्री और उपयंत्री अनिकेत गौरिया का संभागीय यंत्री जोन 10 का प्रभार भी पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। विभाग ने साफ किया है कि बिना पात्रता और गलत तरीके से वित्तीय फैसले लेने वाले इन सभी कार्मिकों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
चहेतों को आगे बढ़ाने का खेल
नगरीय निकायों में मुख्य नगर पालिका अधिकारी, अधीक्षण यंत्री, मुख्य वित्त अधिकारी, उपायुक्त और अमृत योजना जैसे बेहद महत्वपूर्ण पदों पर बिना योग्यता के चहेतों को प्रभार सौंपने का खेल लंबे समय से चल रहा था। इन रसूखदार पदों के जरिए करोड़ों रुपए के निर्माण कार्य, निविदाएं, भुगतान और बड़े प्रशासनिक निर्णय अपनी मर्जी से नियंत्रित किए जा रहे थे। शासन के नए आदेश के बाद इन अपात्र अधिकारियों द्वारा किए गए पुराने कार्य और लिए गए फैसले भी अब अमान्य घोषित हो सकते हैं। इस व्यवस्था से भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और पूरी प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी।
अब भोपाल से होंगी नियुक्तियां
इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल के बाद अब स्थानीय स्तर पर सेटिंग करके मनचाहा पद पाने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि भविष्य में किसी भी नगरीय निकाय में प्रभार देने का निर्णय केवल भोपाल मुख्यालय से ही तय किया जाएगा। गैर पोषक संवर्ग और बिना अधिकार के वित्तीय गड़बड़ी करने वाले अफसरों की अब व्यक्तिगत जवाबदेही तय होगी। सरकार के इस कदम से नगर निगमों और नगर पालिकाओं में सालों से पैर जमाए बैठे अधिकारियों की मनमानी समाप्त होगी और योग्य कर्मचारियों को काम करने का सही मौका मिल सकेगा।
