
पूरी कीमत चुकाने के बाद भी नहीं मिली प्लॉट की रजिस्ट्री, महिलाओं ने पुलिस-प्रशासन से लगाई इंसाफ की गुहार,पीकॉक सिटी के प्लॉट नंबर 68 को लेकर उपजा बड़ा विवाद
जबलपुर। जिले के पाटन अंतर्गत बिनैकी क्षेत्र में एक प्लॉट का सौदा कर करीब 960000 रुपये की धोखाधड़ी करने और पूरी रकम लेने के बाद भी रजिस्ट्री न करने का बड़ा मामला सामने आया है। इस संबंध में आवेदिका श्रीमती किरण केशरवानी पति स्व. संतोष केशरवानी निवासी छोटा फुहारा मिलौनीगंज और रूपाली अग्रवाल पति अजीत अग्रवाल निवासी मदर टेरेसा नगर दीनदयाल वार्ड ने संयुक्त रूप से जबलपुर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक कार्यालय में न्याय के लिए लिखित शिकायत सौंपी है। मामले के अनुसार, बिल्डर शरद मोर पिता स्व. नारायण दास मोर निवासी मिलौनीगंज ने अपने परिवार के साथ मिलकर पीकॉक सिटी ले-आउट के प्लॉट नंबर 68 को बेचने का अनुबंध किया था। आशीष कुमार तिवारी और सर्वेश दुबे के माध्यम से 17 मार्च 2025 को यह विक्रय अनुबंध पत्र निष्पादित हुआ था। आवेदिकाओं ने नगद, आरटीजीएस और अलग-अलग बैंक चेक के माध्यम से पूरी तय राशि का भुगतान कर दिया था, लेकिन अब अनावेदक पक्ष द्वारा न तो जमीन की रजिस्ट्री की जा रही है और न ही एग्रीमेंट की राशि वापस लौटाई जा रही है। शिकायत करते वक्त महिलाओं के साथ अन्य लोग भी मौजूद थे,जिन्हें कथित तौर पर बिल्डर शरद मोर ने ठगा है।
बैंक ट्रांजैक्शन और नगद भुगतान का सिलसिलेवार ब्योरा
इस भूखंड सौदे के लिए आवेदिकाओं द्वारा विभिन्न तारीखों और माध्यमों से शरद मोर को मोटी रकम ट्रांसफर की गई थी। अनुबंध के मुख्य दिन 17 मार्च 2025 को 325000 रुपये नगद सौंपे गए थे। इसके अलावा उसी दिन पंजाब एण्ड सिंध बैंक की नेपियर टाउन शाखा से 70000 रुपये आरटीजीएस के जरिए और 65000 रुपये ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के रूप में भेजे गए, जिससे शुरुआती बयाना राशि ही 460000 रुपये हो गई थी। इसके बाद भारतीय स्टेट बैंक के चेक नंबर 079981 से 60000 रुपये, चेक नंबर 079982 से 60000 रुपये, चेक नंबर 079987 से 70000 रुपये और चेक नंबर 079988 से 50000 रुपये दिए गए। वहीं सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के चेक नंबर 074149 के माध्यम से 100000 रुपये का भुगतान किया गया। इस तरह कुल चेक राशि 340000 रुपये और इसके बाद भी 60000 रुपये, 30000 रुपये, 60000 रुपये, 40000 रुपये और 20000 रुपये की अतिरिक्त किश्तें अनावेदक को दी गईं, लेकिन बिनैकी के डायवर्शन खसरा नंबर 180/1 रकबा 1.380 हेक्टेयर पर बने 800 वर्गफुट के प्लॉट की रजिस्ट्री आज तक नहीं हो सकी।
शिकायत में गंभीर आरोप, पूर्व में भी जहर खाने के नाटक का जिक्र
शिकायतकर्ताओं ने प्रशासनिक अधिकारियों को बताया कि जब भी वे अपनी जमीन की रजिस्ट्री या रकम वापसी का तगादा करते हैं, तो उन्हें डराया-धमकाया जाता है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि लोगों की गाढ़ी कमाई हड़पने के लिए शरद मोर और उसका परिवार पहले भी इस तरह के हथकंडे अपना चुका है। शरद मोर द्वारा वर्ष 2021 और वर्ष 2022 में भी कथित तौर पर जहर खाने की घटनाएं सामने आई थीं और अभी हाल ही में 9 मई 2026 को भी उसने ऐसा ही घटनाक्रम दोहराया ताकि आवेदिकाओं पर उल्टा दबाव बनाया जा सके और रकम हड़पी जा सके। पीड़ितों ने आशंका जताई है कि यदि भविष्य में बिल्डर शरद मोर के साथ कोई अप्रिय बात होती है, तो उसके जिम्मेदार वे खुद होंगे। इस संबंध में 9 मई 2026 को ही थाना विजय नगर में भी एक लिखित शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसमें कुछ निजी अस्पतालों की भूमिका पर भी संदेह जताया गया है।
एक ही भूखंड के कई एग्रीमेंट, कई नागरिकों से करोड़ों का लेन-देन
जांच के लिए सौंपे गए शिकायती दस्तावेजों से यह बात भी सामने आई है कि बिल्डर द्वारा एक ही प्लॉट नंबर के कई अलग-अलग लोगों के साथ सौदे किए गए हैं। इस पूरे जाल में शहर के कई अन्य लोग भी फंसे हुए हैं जिनकी बड़ी रकमें अटकी हैं। शिकायती पत्र के साथ संलग्न सूची के अनुसार, शारदा प्रसाद तिवारी से 1500000 रुपये, मनोज तिवारी से 600000 रुपये और मनीष परसाई से 1000000 रुपये के लेन-देन का मामला भी इसी विवाद से जुड़ा हुआ है। पीड़ित महिलाओं ने अधिकारियों से गुहार लगाई है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाए ताकि धोखाधड़ी करने वाले इस गिरोह पर कानूनी शिकंजा कसा जा सके और पीड़ितों को उनकी डूबी हुई रकम या उनकी अनुबंधित जमीन का मालिकाना हक वापस मिल सके।
