सरेआम हमले का वीडियो होने के बाद भी नामजद एफआईआर गायब, गौर पुलिस की नीयत पर गहराया शक,आईपीएस अधिकारी ने गौर चौकी प्रभारी से मांगा लिखित जवाब, पूछा कार्रवाई में क्यों बरती गई ढिलाई


जबलपुर। गौर क्षेत्र में २४ मई को एक घर में घुसकर जानलेवा हमला, तोड़फोड़ और लूटपाट की सनसनीखेज वारदात के बाद स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस मामले में गौर चौकी प्रभारी नितिन पांडे की भूमिका को लेकर पीड़ित आलोक शुक्ला और शिवेंद्र कुमार सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों व स्वयंसेवी संगठनों में भारी आक्रोश है। आधी रात को हुई इस गुंडागर्दी का वीडियो उपलब्ध होने के बावजूद पुलिस द्वारा बेहद मामूली धाराओं में केस दर्ज करने और आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से पीड़ित परिवार खौफ के साए में जीने को मजबूर है। घटना के समय पुलिस की मौजूदगी में ही आरोपी मारपीट और गाड़ियों में तोड़फोड़ करते रहे, जिससे चौकी प्रभारी की नीयत पर संदेह गहरा गया है। इस पूरे ढुलमुल रवैये को लेकर आईपीएस थाना प्रभारी शुभम सिंह ठाकुर ने भी नितिन पांडे से स्पष्टीकरण मांगते हुए जवाब तलब किया है कि ३ दिन की देरी से एफआईआर क्यों दर्ज हुई और उसमें मुख्य आरोपियों के नाम क्यों गायब हैं। अब इस पक्षपातपूर्ण रवैये के खिलाफ मंगलवार को पीड़ित, जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठन एकजुट होकर पुलिस अधीक्षक को एक शिकायती ज्ञापन सौंपेंगे, जिसमें आरोपियों पर हत्या के प्रयास व लूट की धाराएं बढ़ाने और चौकी प्रभारी पर कार्रवाई की मांग की जाएगी।
रक्षक ही बना भक्षक, वीडियो सबूत के बाद भी अपराधियों को खुला संरक्षण
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि पीड़ित आलोक शुक्ला और शिवेंद्र कुमार ने पुलिस को हमले के पुख्ता फोटोग्राफ और वीडियो सौंपे हैं। इन साक्ष्यों में साफ दिखाई दे रहा है कि हमलावर सरेआम जानलेवा हमला कर रहे हैं और पुलिस मूकदर्शक बनकर खड़ी है। इसके बावजूद चौकी प्रभारी नितिन पांडे ने निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय उल्टा पीड़ितों को ही धमकाना शुरू कर दिया। जब पीड़ितों ने वीडियो के आधार पर आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की, तो नितिन पांडे ने साफ कह दिया कि उन्होंने अपने हिसाब से कार्रवाई की है, पीड़ितों को जो करना हो वे कर लें। इतना ही नहीं, पुलिस ने उल्टा पीड़ितों पर ही जवाबी कार्रवाई का दबाव बना दिया है, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और वे अब भी खुलेआम घूमकर पीड़ितों को जान से मारने की धमकियां दे रहे हैं।
उच्च अधिकारियों की फटकार के बाद भी गौर चौकी प्रभारी के तेवर बेअसर
मामले की गंभीरता को देखते हुए आईपीएस थाना प्रभारी शुभम सिंह ठाकुर ने भी गौर चौकी प्रभारी की संदिग्ध कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने नितिन पांडे से इस बात का लिखित जवाब मांगा है कि इतनी बड़ी वारदात होने के बाद भी आरोपियों पर सख्त धाराएं क्यों नहीं लगाई गईं और एफआईआर दर्ज करने में ३ दिन का समय क्यों बर्बाद किया गया। इसके साथ ही एफआईआर में उन मुख्य हमलावरों के नाम भी शामिल नहीं किए गए हैं जो वीडियो में साफ तौर पर गुंडागर्दी करते नजर आ रहे हैं। उच्च अधिकारी की इस तल्ख टिप्पणी से यह साफ हो गया है कि निचले स्तर पर पुलिस की मिलीभगत के कारण ही अपराधियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे पुलिस प्रशासन की साख धूमिल हो रही है।
मंगलवार को एसपी दफ्तर का घेराव करेंगे
चौकी प्रभारी के इस दमनकारी और टालमटोल रवैये से तंग आकर अब पीड़ितों ने न्याय के लिए उच्च स्तर पर लड़ाई लड़ने का फैसला किया है। मंगलवार को क्षेत्र के तमाम जनप्रतिनिधि, स्वयंसेवी संगठन और आम नागरिक एकत्रित होकर पुलिस अधीक्षक के पास जाएंगे। एसपी को सौंपे जाने वाले इस शिकायती ज्ञापन में मांग की जाएगी कि मामले में तुरंत हत्या के प्रयास और लूट की धाराएं जोड़ी जाएं। साथ ही, वीडियो में दिख रहे सभी आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए और कर्तव्य में लापरवाही बरतने वाले गौर चौकी प्रभारी नितिन पांडे को पद से हटाया जाए। पीड़ितों का कहना है कि वे अपने ही घर जाने से डर रहे हैं और जब तक उन्हें सुरक्षा और न्याय नहीं मिलता, यह आंदोलन जारी रहेगा।
